
क्या भारत ने लगा दिया रूस से तेल खरीद पर ब्रेक? अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि का आया बयान
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अमेरिका के ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने दावा किया है कि भारत ने रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद कम करना शुरू कर दिया है और अमेरिकी ऊर्जा समेत अन्य देशों से खरीद बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान और तकनीक समेत बड़े पैमाने पर खरीद के लिए प्रतिबद्ध है.
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीयर ने दावा किया है कि भारत ने रूसी तेल और ऊर्जा उत्पादों की खरीद कम करना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि भारत अब अमेरिकी ऊर्जा और अन्य स्रोतों से ऊर्जा खरीद को दोबारा बढ़ा रहा है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत वास्तव में रूसी तेल से दूरी बना रहा है और क्या वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान और तकनीक सहित 500 अरब डॉलर तक की खरीद के लिए प्रतिबद्ध है तो ग्रीयर ने कहा कि इसका संक्षिप्त जवाब 'हां' है.
USTR प्रमुख के मुताबिक, भारत पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद को धीरे-धीरे कम कर रहा है और अमेरिकी ऊर्जा के साथ-साथ अन्य देशों से भी आपूर्ति बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में भारत से वेनेजुएला के तेल को लेकर भी बातचीत की गई है.
ग्रीयर ने कहा कि 2022 से पहले भारत रूस से बड़े पैमाने पर तेल नहीं खरीदता था. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सस्ते रूसी तेल की उपलब्धता के कारण भारत ने खरीद बढ़ाई थी. उन्होंने दावा किया कि भारत रूसी तेल को रिफाइन कर गैस और अन्य उत्पाद यूरोप को बेच रहा था और इस प्रक्रिया में यूरोप और भारत दोनों ही रूस-यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से सहारा दे रहे थे.
USTR प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव को लेकर गंभीर है और उसने पहले ही कुछ अमेरिकी चिंताओं को संबोधित किया है. उनके मुताबिक भारत ने अमेरिका पर लगाए गए डिजिटल सर्विस टैक्स में कटौती की है, और अब टैरिफ कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है.
ग्रीयर ने इस पूरी प्रक्रिया को एक 'बेहद अहम समझौता' बताया और कहा कि इसका असर आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों में देखा जाएगा.

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