
क्या ट्रंप narcissist हैं? खुद को जीनियस बताना, नोबल को लेकर पागलपन और आडंबर... क्यों उठते हैं सवाल
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खुद को 'फील गुड' कराने की चाहत इस कदर तक बढ़ जाए कि व्यक्ति सामाजिक मर्यादा ही भूल जाए. कोई खुद के लिए पुरस्कार की पैरवी कर सकता है क्या? अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयानों और कदमों से ऐसा ही जाहिर किया है. इससे लगता है कि वे 'आत्ममुग्धता- Narcissism' के शिकार हैं. ट्रंप की मनोस्थिति पर एक्सपर्ट का क्या कहना है?
अपनी प्रशंसा सुनना तो सभी को पसंद होता है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए प्रशंसा सुनने की तलब लत की तरह लग गई है. वह दर्जनों बार दुनिया को बता चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया है. वह दुनिया के कुछ ही व्यक्तियों में शामिल होंगे जिन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी पैरवी खुद ही कर डाली. वो भी एक दो बार नहीं, बल्कि कई बार.
ट्रंप लंब समय खुद को लेकर खुशफहमी में रहे हैं और अपनी खुशामद खुद ही करते रहे हैं. 2018 में ट्रंप ने खुद को जीनियस कहा था. ट्रंप ने कहा था कि उनके पूरे जीवन में उनकी दो सबसे बड़ी खूबियां मानसिक स्थिरता और बेहद बुद्धिमान होना रही हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, "मैं एक बेहद सफल व्यवसायी से, एक टॉप टीवी स्टार और फिर पहली ही कोशिश में संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति बन गया. मुझे लगता है कि इसे बुद्धिमानी नहीं, बल्कि जीनियस कहा जाएगा... और वह भी एक बहुत ही स्टेबल जीनियस!"
जब कोई नेता खुद के लिए खुलेआम नोबेल मांगता है, तो इसे Narcissism (अति आत्ममुग्धता) और Recognition-hunger (अति मान्यता की भूख) से जोड़ा जाता है.
25 सिंतबर को ट्रंप जब ओवल ऑफिस में मिल रहे थे तो उन्होंने अपने कोट पर F-35 फाइटर जेल का लोगो लगा लिया था. ये भी एक तरह का मैसेज था.
तजुर्बा यह है कि किसी को 'महान' 'शानदार', 'प्रतिभाशाली' या 'जीनियस' का तमगा उसे समाज देता है. जनता देती है, लोग देते हैं. बड़े पुरस्कार आमतौर पर दूसरों द्वारा नॉमिनेट किए जाने चाहिए. खुद के लिए नामांकन या दावा करना Narcissistic tendencies का संकेत माना जाता है.

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