
कॉमरेड का किस: दो राष्ट्रपतियों का वो चुंबन जो कोल्ड वार का सबसे चर्चित प्रतीक बन गया!
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कोल्ड वॉर के जिओ-पॉलिटकल दौर में जब विचारधारा और प्रभुत्व की लड़ाई लड़ी जा रही थी तो कई वाकये हुए और दर्जनों कहानियां बनी. चालीस से पचास साल का वक्त गुजर जाने के बाद भी इन कहानियों का रोमांच कम नहीं हुआ है. ऐसी ही एक कहानी एक सियासी चुंबन की है जब आइडियोलॉजी में पगे सोवियत रूस के नेता ने सार्वजनिक मंच से अपने मेजबान कॉमरेड को चूम लिया.
'चुंबन की आवाज तोप के धमाके की तरह जोरदार नहीं होती, लेकिन इसका करंट लंबे समय तक अनुगूंज पैदा करता रहता है.' शीत युद्ध की सर्वाधिक चर्चित तस्वीरों में से एक ये फोटो (ऊपर) अमेरिकी कवि ओलिवर वेंनडेल की अभिव्यक्ति को सटीक ढंग से कैद करता है.
ओलिवर वेंनडेल ने 1859 में अपने लेख ऑटोक्रेट ऑफ द ब्रेकफास्ट टेबल में लिखा था- 'The sound of a kiss is not so loud as that of a cannon, but its echo lasts a great deal longer.' यूं तो इन लाइनों में ओलिवर का ये संदेश छिपा है कि प्रेम और स्नेह हिंसा और टकराव से अधिक महत्वपूर्ण है.
लेकिन त्रासदी ये रही कि जिस राजनीतिक पृष्ठभूमि में इस चुंबन को दो राष्ट्राध्यक्षों ने एक दूसरे के अधरों पर अंकित किया वो समय आधुनिक इतिहास में दो महाशक्तियों के जबरदस्त टकराव भरे दौर की याद दिलाता है.
वो दौर था कोल्ड वार का. सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद विश्व के देश दो खेमों में बंट चुके थे. कम्युनिस्ट ब्लॉक का लीडर सोवियत रूस था और कैपिटलिस्ट मोर्चे का कर्ता-धर्ता था संयुक्त राज्य अमेरिका.
जब मिले आधे यूरोप का किस्मत लिखने वाले दो दिग्गज कम्युनिस्ट
इसी परिस्थिति में आज से ठीक 44 साल पहले यानी कि 7 अक्टूबर 1979 को वो दो स्टेट्समैन मिले जो आधे यूरोप का भाग्य निर्धारित करते थे. ये शख्सियतें थीं सोवियत रूस (USSR)के राष्ट्रपति लियोनिद ईलिच ब्रेझनेव (Leonid Ilyich Brezhnev). ब्रेझनेव उस वक्त सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय समिति के महासचिव थे. दूसरी ओर थे पूंजीवादी अमेरिका के प्रभाव को नकार कर बनने वाले पूर्वी जर्मनी के चीफ लीडर एरिच अर्नेस्ट पॉल होन्कर (Erich Ernst Paul Honecker). एरिच होन्कर पूर्वी जर्मनी की सोशलिस्ट एकता पार्टी के महासचिव थे. पूर्वी जर्मनी तब यूरोप में कम्युनिस्ट विचारधारा का झंडाबरदार था जो पूंजीवादी अमेरिका के साथ टकराव में सोवियत रूस के साथ तनकर खड़ा था.

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