
'कुरान की कोई हैसियत नहीं...', पाकिस्तान में क्यों भड़के मौलाना? कानून तोड़ने की वॉर्निंग दी
AajTak
पाकिस्तान में जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (फज्ल) के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने बाल विवाह पर लगे प्रतिबंधों को इस्लामी कानून के खिलाफ बताया. उन्होंने खुलेआम इन कानूनों को तोड़ने की धमकी दी है. उन्होंने कहा कि अगर बाल विवाह पर रोक लगानी है तो पाकिस्तान को इस्लामिक देश का दर्जा छोड़कर खुद को सेकुलर घोषित कर देना चाहिए.
इस्लामिक देश पाकिस्तान में बाल विवाह पर बैन के मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बलूचिस्तान समेत पाकिस्तान के कई हिस्सों में बाल विवाह पर प्रतिबंध है लेकिन अभी भी पाकिस्तान के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां बाल विवाह हो रहा है. पाकिस्तान में बाल विवाह पर रोक लगाने की कोशिशों को लेकर जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (फज्ल) (JUI-F) के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने कड़ी आपत्ति जताई है.
उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा ही करना है तो पाकिस्तान को इस्लामिक नहीं बल्कि खुद को सेक्युलर देश घोषित कर देना चाहिए.
पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर मौलाना ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार ने बाल विवाह पर रोक के लिए जिस तरह के कानून बनाए हैं वो उन्हें तोड़ देंगे.
मौलाना ने कानून तोड़ने का किया ऐलान
बुर्का पहने संसद में बैठी महिला सांसदों के बीच खड़े होकर मौलाना ने कहा, 'मैं ऐलान करता हूं कि मैं सरेआम इन कानूनों को तोड़ूंगा. मैं 16 साल और 12 साल और 10 साल के जवानों की शादियां कराऊंगा. फिर देखूंगा कि आप किस तरह मेरा मुकाबला करते हैं. मैं आपके कानून को चैलेंज करता हूं. मैं आपकी मानसिकता को चैलेंज करता हूं.'
उन्होंने आगे कहा, 'पाकिस्तान में जब ये कानून बने तो इसी संसद में खड़े होकर मैंने उसका विरोध किया था. हमने इस कानून को कुरान, सुन्नत और अपने संविधान के खिलाफ जाकर पारित किया है.'

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









