
'किसी का हाथ कटा था, किसी का पैर..., गम में कल नहीं मनाई बकरीद,' बंगाल रेल हादसे के चश्मदीदों ने बताई पूरी कहानी
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हादसा सुबह करीब 8.55 बजे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से 30 किमी दूर रंगपानी स्टेशन के पास हुआ. मालगाड़ी के इंजन की टक्कर के बाद कंचनजंगा एक्सप्रेस के पीछे के चार डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस हादसे के बाद इलाके में गम का माहौल देखा जा रहा है. जहां हादसा हुआ, वहां स्थानीय लोगों ने सोमवार को बकरीद का त्योहार नहीं मनाया.
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में सोमवार को बड़ा रेल हादसा हो गया. वहां एक मालगाड़ी ने सियालदह जाने वाली कंचनजंगा एक्सप्रेस को टक्कर मार दी. हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और 41 घायल हो गए. मरने वालों में मालगाड़ी का लोको पायलट और पैसेंजर ट्रेन का गार्ड भी शामिल है.
यह हादसा सुबह करीब 8.55 बजे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से 30 किमी दूर रंगपानी स्टेशन के पास हुआ. मालगाड़ी के इंजन की टक्कर के बाद कंचनजंगा एक्सप्रेस के पीछे के चार डिब्बे पटरी से उतर गए थे. रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने कहा, टक्कर इसलिए हुई क्योंकि मालगाड़ी ने सिग्नल की अनदेखी की. हालांकि, सिन्हा ने स्वीकार किया कि रेलवे की 'कवच' (ट्रेन टकराव रोधी प्रणाली) गुवाहाटी-दिल्ली मार्ग पर एक्टिव नहीं है, जहां दुर्घटना हुई है. रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है.
इस हादसे के बाद इलाके में गम का माहौल देखा जा रहा है. जहां हादसा हुआ, वहां स्थानीय लोगों ने सोमवार को बकरीद का त्योहार नहीं मनाया. पूरा गांव बचाव और राहत कार्य में जुटा रहा. युवाओं की टोली ने घायलों को बोगियों से निकाला और मेडिकल कॉलेज भेजा. प्रत्यक्षदर्शियों ने आजतक से बातचीत में पूरी घटना के बारे में जानकारी दी है.
निर्मलज्योत क्षेत्र में नहीं मनाई गई बकरीद
ये रेल हादसा सिलीगुड़ी के निर्मलज्योत क्षेत्र में हुआ है. हादसे के कारण निर्मलज्योत क्षेत्र के ग्रामीणों ने सोमवार को बकरीद नहीं मनाई. अब यहां के लोग आज यानी मंगलवार को बकरीद मनाएंगे. ग्रामीणों ने खुद फैसला लिया था. स्थानीय निवासी कहते हैं कि जब हादसा हुआ, तब तक हम लोग ईद की नमाज पढ़ चुके थे. हादसे से गम का माहौल था, इसलिए हम लोगों ने मिलकर तय किया कि कुर्बानी कल (मंगलवार) करेंगे. भाईचारे के नाते हमने फैसला लिया है. गांव वालों ने जैसे ही हादसे के बारे में सुना तो मौके पर पहुंचे और राहत बचाव कार्य में लग गए. किसी का हाथ कटा था, किसी का पैर. किसी के सिर में जख्म थे. उन लोगों को हमने निकाला और अस्पताल पहुंचाया. ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बचाव कार्य में मदद की. गांव में करीब 80 घर हैं.
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