
किडनी की दवा नीरी केएफटी से होगा जलोदर का उपचार! अध्ययन में मिली असरदार
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जलोदर के मरीजों की छोटी करनी पड़ती थी लेकिन अब कर्नाटक के मैसूर स्थित एक मेडिकल कॉलेज के शोधार्थियों ने दावा किया है कि किडनी की बीमारियों की दवा नीरी केएफटी इस रोग के उपचार में भी असरकारक है.
किडनी से संबंधित बीमारियों के उपचार में उपयोग की जाने वाली दवा नीरी केएफटी से जलोदर (एसाइटिस) का भी उपचार संभव हो सकता है. नीरी केएफटी एक अध्ययन में जलोदर के मरीजों पर भी असरदार पाई गई है. कर्नाटक के मैसूर स्थित जेएसएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के शोधार्थियों ने एक अध्ययन के बाद ये दावा किया है. यह अध्ययन जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है.
डॉक्टर्स के मुताबिक अध्ययन के दौरान जब जलोदर के मरीजों के उपचार में नीरी केएफटी को शामिल किया गया तो काफी तेजी से इसके सकारात्मक परिणाम नजर आए. मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर कोमला ए, प्रोफेसर सिद्धेश अराध्यमठ और शोधकर्ता मल्लीनाथ आईटी ने मिलकर भर्ती मरीजों का आयुर्वेद के फॉर्मूले से इलाज किया.
शोधार्थियों का कहना है कि अभी तक आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में हमें जानकारी थी लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसकी पुष्टि होना जरूरी था. इसीलिए ये अध्ययन किया गया. डॉक्टर्स के अनुसार आमतौर पर इस स्थिति में एक छोटी सर्जरी के जरिये पेट से पानी निकाला जाता है. पेट में पंक्चर करने के बाद यह पानी बाहर आ पाता है लेकिन अब यह बगैर किसी सर्जरी के भी संभव हुआ है.
एमिल फार्मास्युटिकल्स के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर संचित शर्मा ने कहा कि नीरी केएफटी गुर्दों की कार्य क्षमता को बेहतर कर शरीर में एकत्रित अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने में सक्षम है. उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग मेडिकल अध्ययनों में ये वैज्ञानिक तौर पर साबित भी हुआ है. डॉक्टर संचित के मुताबिक इसका सही मात्रा में उपयोग मरीजों के लिए अत्यंत प्रभावी हो सकता है.
दरअसल, नीरी केएफटी में पुनर्नवा, वरुण, सिगरु, सारिवा, कासनी, मकोय, शिरीष जैसी औषधियां शामिल हैं. किडनी रोग में ये औषधियां काफी असरदार हैं. साथ ही इसके इस्तेमाल से डायलिसिस चक्र भी कम किए जा सकते हैं. शोध के निष्कर्ष में दावा किया गया है कि अब आयुर्वेदिक उपचार के जरिये भी जलोदर रोगियों को लाभ मिल सकता है. पेट में सुई चुभोकर तरल पदार्थ बाहर निकालने जैसे उपचार की जरूरत नहीं है.
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