
कार से लटके, फुटपाथ पर बिखरे दिखे शव... क्यों सामान्य नहीं लग रही दिल्ली ब्लास्ट की घटना
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इस जगह पर हमेशा भीड़ रहती है. मेट्रो स्टेशन से निकलते यात्रियों, ऑटो-रिक्शा और दुकानदारों की रोज की हलचल यहां आम बात है. ऐसे में लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास यह धमाका सिर्फ एक विस्फोट नहीं, बल्कि दिल्ली की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है.
सोमवार की शाम, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास का माहौल चीखों और दहशत में बदल गया. शाम 6 बजकर 52 मिनट पर, लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के नजदीक, एक खड़ी कार में हुए जोरदार धमाके ने जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया.
इस धमाके में 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 24 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. धमाके की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए, मेट्रो स्टेशन के गेट का शीशा तक चकनाचूर हो गया और आस-पास की स्ट्रीट लाइटें टूट गईं.
चश्मदीदों ने बताया कि यह मंजर ऐसा था कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में इतना बड़ा धमाका कभी नहीं सुना. दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने दर्दनाक गवाही देते हुए कहा कि धमाके के बाद फुटपाथ पर लोगों के शव बिखरे पड़े थे और गाड़ियों में पड़े हुए थे. लोक नारायण जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 30 से अधिक घायल अस्पताल लाए गए हैं. इनमें से 10 की मौत हुई है. 20 से अधिक का इलाज चल रहा है.
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लोगों की आंतें बाहर आ गई
डॉक्टर ने बताया, 'घायलों में कई जली झुलसी हालत में हैं. 20 से अधिक धमाके की वजह से घायल हुए हैं. यानी छर्रे और कंक्रीट के टुकड़े उनके बदन में घुस गए हैं. अधिकतर घायलों के पेट और पैरों में छर्रे लगे हैं. कुछ लोगों की आंतें भी बाहर आ गई हैं. पेट का ऑपरेशन किया जा रहा है.'

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