
काबुल में क्या खिचड़ी पक रही है? पाक-चीन और अफगान विदेश मंत्रियों की बैठक, भारत के लिए क्यों है अहम
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चीनी विदेश मंत्री वांग यी तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार दिन भर चलने वाली इस बैठक में शामिल होंगे. इस सम्मेलन के जरिए तालिबान वैश्विक मंच पर अपनी वैधता को बढ़ावा देने की कोशिशों में लगा हुआ है. वहीं चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाने की फिराक में है.
चीन के विदेश मंत्री वांग यी अपने भारत दौरे के बाद बुधवार को अफगानिस्तान पहुंचे हैं, भारत की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दिल्ली से सीधे इस्लामाबाद जाने से परहेज किया. वह काबुल में होने वाले त्रिपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. अफगानिस्तान, चीनी विदेश मंत्री के अलावा पाकिस्तान के विदेश मंत्री की भी मेजबानी करेगा. इस त्रिपक्षीय सम्मलेल में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के काबुल तक विस्तार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी. भारत भी इस बैठक पर नजर बनाए हुए है.
क्या चाहता है अफगानिस्तान?
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इससे पहले अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के साथ भी बातचीत की थी. वांग यी, जो सीपीईसी केंद्रीय समिति के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य भी हैं, व्यापक क्षेत्रीय दौरे पर हैं. चीनी विदेश मंत्री 21 अगस्त को पाकिस्तान का दौरा भी करेंगे.
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चार साल पहले सत्ता में आने के बाद से अफगान तालिबान की अगुवाई में यह पहली हाई लेवल मीटिंग होगी, जिसका मकसद अपनी अंतरराष्ट्रीय वैधता की कोशिश को मजबूत करना भी है. अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता हाफिज जिया अहमद ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'तीनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.'
चीनी विदेश मंत्री क्यों पहुंचे काबुल?

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