
कांग्रेस-DMK गठबंधन में टकराव, क्या राहुल गांधी को विजय की पार्टी TVK का साथ मंजूर होगा?
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तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सीटों के बंटवारे, सत्ता में साझेदारी और संभावित नए गठबंधनों को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं. इन घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस नेतृत्व, क्षेत्रीय दलों और नए राजनीतिक खिलाड़ियों की भूमिकाएं राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं.
कांग्रेस और डीएमके गठबंधन में हालिया तनाव थोड़ा कम हुआ है. थोड़ा और होने की जरूरत है. जो होना बचा है, वो जो हुआ है उससे ज्यादा मुश्किल लगता है. आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए डीएमके की तरफ से कांग्रेस को 32 सीटों की पेशकश की गई है.
कांग्रेस नेता तमिलनाडु में भी बिहार चुनाव की ही तरह तेवर दिखाने लगे हैं. ये तब भी हो रहा है, जब बिहार में आरजेडी के मुकाबले तमिलनाडु में डीएमके मजबूत स्थिति में है. सत्ता पर भी काबिज है. हर चुनाव की तरह तमिलनाडु में भी पहला पेच तो सीटों के बंटवारे पर ही फंसा है, लेकिन मुश्किलें और भी हैं.
सीटों का बंटवारा, असल में, भविष्य की संभावित सत्ता में साझेदारी की नींव होती है. और, ये तकरीबन सभी चुनाव पूर्व गठबंधनों पर लागू होती है. तमिलनाडु की मुश्किल एक अपवाद के कारण है. तमिलनाडु में चुनावी गठबंधन तो हो जाता है, लेकिन सत्ता में साझेदारी नहीं होती. ये अघोषित परंपरा चली आ रही है - लेकिन, अब कांग्रेस ये एकतरफा परंपरा हजम नहीं हो रही है.
तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके के सामने कांग्रेस के तीखे तेवर दिखाने एक बड़ी वजह, सूबे की राजनीति में एक नए प्लेयर की जोरदार एंट्री है. नए प्लेयर थलपति विजय हैं, जो चुनाव से पहले मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. तमिलनाडु के कांग्रेस नेताओं का एक तबका डीएमके की जगह विजय की पार्टी टीवीके के साथ नए गठबंधन की पैरवी कर रहा है - लेकिन क्या ये राहुल गांधी को भी मंजूर होगा?
क्या कांग्रेस-डीएमके गठबंधन खतरे में है?
तमिलनाडु में भी कांग्रेस ने अपनी डिमांड में बिहार की ही तरह अपने लिए सीटों की एक निश्चित संख्या रखी थी. लेकिन, डीएमके नेतृत्व ने असहमति दिखाई, और ज्यादा से ज्यादा 32 सीटें शेयर करने के संकेत दिए. बात न बनते देख कांग्रेस की तरफ से मांग घटाकर 38 सीटें की गई हैं. हालांकि, तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता इसे भी नाकाफी मान रहे हैं.

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