
'कांग्रेस को हमेशा शकुनि, चौसर और चक्रव्यूह क्यों याद आते हैं?' राज्यसभा में शिवराज सिंह चौहान ने घेरा
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस के 'कांग्रेस के DNA में ही किसान विरोध है. उन्होंने कहा कि इंदिरा के जमाने में जबरदस्ती लेवी वसूली का काम किया जाता था. भारत आत्मनिर्भर नहीं हुआ. राजीव गांधी ने एग्रीकल्चर प्राइस पॉलिसी की बात जरूर की, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.
केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस को हमेशा शकुनि, चौसर और चक्रव्यूह याद आते हैं. जब हम महाभारत काल में जाते हैं. तब हमें तो कन्हैया याद आते हैं. अनीति और अधर्म किसने किया, ठगी किसने की. कांग्रेस के डीएनए में ही किसान विरोध है.
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री चौहान शिवराज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को हमेशा शकुनि, चौसर और चक्रव्यूह क्यों याद आते हैं? "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मुरत देखी तिन तैसी." शकुनि धोखे और कपट के प्रतीक थे, चौसर में धोखा और चक्रव्यूह में घेर कर मारना होता है. क्या कांग्रेस का असली चेहरा यही है? "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी" जब हम महाभारत काल में जाते हैं तो हमें भगवान श्रीकृष्ण नजर आते हैं, जबकि विपक्ष को छल-कपट और अधर्म के प्रतीक शकुनी तथा चौसर का ध्यान आता है. कर्ज माफी की बात हो रही थी. मैंने शकुनि, चौसर और ठगी का जिक्र किया. कांग्रेस ने अपने केंद्र और राज्य के घोषणापत्र में कई बार कहा कि सरकार में आते ही कर्ज माफ कर देंगे. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में 10 दिन में 2 लाख तक के कर्ज माफ नहीं तो 11वें दिन मुख्यमंत्री हटाने का वादा किया.
'सड़ा हुआ गेहूं खाने को मजबूर किया'
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही कांग्रेस की प्राथमिकताएं गलत रही हैं. हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, मैं उनका आदर करता हूं. वह रूस से एक मॉडल देखकर आए और कहा कि इसे लागू करो. चौधरी चरण सिंह ने कहा कि ये गलत है. 17 साल प्रधानमंत्री रहे, लेकिन क्या हुआ. अमेरिका से सड़ा हुआ लाल गेहूं भारत को खाने पर मजबूर किया गया.
शिवराज सिंह ने आगे कहा कि इंदिरा के जमाने में जबरदस्ती लेवी वसूली का काम किया जाता था. भारत आत्मनिर्भर नहीं हुआ. राजीव गांधी ने एग्रीकल्चर प्राइस पॉलिसी की बात जरूर की, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. नरसिम्हा राव की सरकार में भी कृषि से जुड़े उद्योगों की भी डी-लाइसेंसिंग नहीं की. 2004 से 2014 की क्या बात करूं, उस समय घोटालों के देश में जाने जाते थे. भारत की राजनीति में, राजनीतिक क्षितिज पर एक दैदीप्यमान सूर्य का उदय हुआ, जिसने पूरे देश को विश्व से भर दिया- नरेंद्र मोदी. मोदी सरकार ने कृषि की प्राथमिकताएं बदल दीं.
'हमारी हैं छह प्राथमिकताएं'

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