
कहीं समर्थन, कहीं विरोध... ईरान की जंग पर क्या कह रही वेस्टर्न और मिडिल ईस्ट की मीडिया?
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इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक मीडिया को दो धड़ों में बांट दिया है. पश्चिमी मीडिया ने हमलों को सुरक्षा और रणनीतिक जरूरत बताया, जबकि मिडिल ईस्ट की मीडिया ने इसे आक्रामक कदम और क्षेत्रीय अस्थिरता की वजह माना. पढ़ें ईरान युद्ध पर क्या पश्चिमी और खाड़ी मीडिया का रुख...
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई जंग ने दुनिया भर की मीडिया को मानो दो धड़ों में बांट दिया है. इज़रायल ने अमेरिका के समर्थन से ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल गोदामों और तेहरान में मौजूद बड़े नेताओं को निशाना बनाया. खबरों के मुताबिक 200 से ज्यादा लड़ाकू विमान इस ऑपरेशन में शामिल थे.
इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इजरायल की आयरन डोम और अरब सहयोगी देशों की एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को दुनिया की मीडिया ने अलगअलग तरीके से दिखाया.
ईरान पर इजरायल-US के हमले को लेकर पश्चिमी मीडिया का रुख
पश्चिमी मीडिया के बड़े चैनलों ने इन हमलों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ जरूरी कदम बताया. CNN ने इसे एक बड़ा और योजनाबद्ध हमला बताया और कहा कि 30 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया. चैनल ने अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स और इजरायली सेना की जानकारी को प्रमुखता से दिखाया. रिपोर्टिंग का अंदाज ज्यादातर फैक्ट आधारित रहा, लेकिन इजरायल के इस तर्क को भी जगह दी गई कि यह उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी था. संयुक्त राष्ट्र की अपील का जिक्र भी हुआ, मगर ध्यान सैन्य कार्रवाई और उसकी सफलता पर ज्यादा रहा.
रिपब्लिकन पार्टी के मुखपत्र कहे जाने वाले Fox News ने इस ऑपरेशन को और ज्यादा मजबूत और आक्रामक शब्दों में दिखाया. चैनल ने इसे राष्ट्रपति ट्रंप की बड़ी रणनीतिक जीत बताया. ईरान के पुराने विवादों और 1979 के दूतावास संकट का जिक्र करते हुए कार्रवाई को सही ठहराया गया. यहां कवरेज में अमेरिकी ताकत और संभावित शासन बदलाव पर ज्यादा चर्चा हुई, जबकि आम लोगों के नुकसान पर कम फोकस दिखा.
वहीं MSNBC ने इस हमले पर सवाल उठाए. चैनल ने पूछा कि क्या अमेरिका को बिना कांग्रेस की मंजूरी के ऐसे हमले में शामिल होना चाहिए था. रिपोर्टिंग में क्षेत्रीय युद्ध का खतरा, नागरिकों की मौत और कूटनीतिक बातचीत के खत्म होने पर ज्यादा चर्चा देखी गई. कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि यह टकराव पूरे मध्य पूर्व को जंग में धकेल सकता है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.

ईरान ने पहली बार अपनी घातक मिसाइल सेजिल का इस्तेमाल कर इजरायल पर हमला किया है. इस हमले से ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ 54वां चरण शुरु कर दिया है. IRGC के ऐरोस्पेस प्रमुख ने बताया कि सेजिल मिसाइल से कमांड और कंट्रोल केंद्रों पर मला किया. इस मिसाइल में ईरान के अंदर से इजरायल को निशाना बनाने की पूरी क्षमता है.









