
कराची में US दूतावास में घुसे पाकिस्तानी प्रोटेस्टर, अमेरिकी सैनिकों की फायरिंग में 10 की मौत
AajTak
कराची में ईरान हमलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में घुसने का प्रयास किया. सामा टीवी के अनुसार, सुरक्षा बलों की फायरिंग में 10 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 30 घायल हुए हैं. पुलिस ने स्थिति काबू करने के लिए भारी गोलाबारी और आंसू गैस का प्रयोग किया.
खामेनेई की मौत के बाद प्रदर्शन की आग पाकिस्तान तक पहुंच चुकी है. पाकिस्तान के कराची में उग्र प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने अमेरिकी दूतावास परिसर के बाहर हिंसक प्रदर्शन करते हुए आगजनी और तोड़फोड़ की. स्थिति बिगड़ने पर US कॉन्सुलेट में तैनात अमेरिकी मिलिट्री के जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाई जिसमें 10 लोगों के मारे जाने की खबर है.
घटना उस समय शुरू हुई जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कराची के एम.टी. खान रोड (MT Khan Road) पर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर एकत्र हुए. प्रदर्शनकारी ईरान में अयातुल्ला खामेनेई और उनके परिवार को निशाना बनाए जाने के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे.
तभी हालात बेकाबू हो गए जब प्रदर्शनकारियों ने दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश की और सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और वहां तैनात अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पहले भारी आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर सीधी फायरिंग शुरू कर दी.
यह भी पढ़ें: सऊदी प्रिंस और इजरायल ने बार-बार किया ट्रंप को फोन... खामेनेई के खात्मे के प्लान की इनसाइड स्टोरी
बचाव अधिकारियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा में अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है. पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और भारी सुरक्षा बल तैनात है.
आक्रोश का वैश्विक असर यह घटना दिखाती है कि ईरान पर हुए हमलों के बाद मुस्लिम देशों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कितना जबरदस्त आक्रोश है. कराची की यह हिंसा क्षेत्र में बढ़ते तनाव का ताजा उदाहरण है, जहां अब सीधे तौर पर अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाया जा रहा है. प्रदर्शनकारी लगातार अमेरिका विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं और इस्लामिक नेताओं की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.यह भी पढ़ें: 'हमने अपने सर्वोच्च लीडर को खो दिया', ईरानी सेना ने की खामेनेई की मौत की पुष्टि

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








