
कभी विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर भेजी गई थी महिला, अब CAA के तहत मिली भारतीय नागरिकता
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असम के कछार जिले की 59 वर्षीय देपाली दास को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता मिल गई है. खास बात यह है कि उन्हें 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर भेज दिया था, जहां उन्होंने करीब दो साल बिताए. अब वह असम की पहली ऐसी घोषित विदेशी बन गई हैं, जिन्हें डिटेंशन सेंटर से रिहाई के बाद नागरिकता मिली है.
असम के कछार में एक ऐसी महिला को भारतीय नागरिकता मिल गई है, जिसे कभी विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. 59 वर्षीय देपाली दास को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता दी गई है. वह असम की पहली ऐसी घोषित विदेशी हैं, जिन्हें डिटेंशन सेंटर में रहने और बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद CAA के तहत नागरिकता मिली है.
एजेंसी के अनुसार, देपाली दास कछार के धोलाई विधानसभा क्षेत्र के हवैथांग इलाके की रहने वाली हैं. फरवरी 2019 में एक फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें अवैध प्रवासी घोषित कर दिया था. इसके बाद पुलिस ने 10 मई 2019 को उन्हें हिरासत में लेकर सिलचर के डिटेंशन सेंटर भेज दिया था. वह लगभग दो साल तक डिटेंशन सेंटर में रहीं. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 मई 2021 को उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.
देपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के दिप्पुर गांव की रहने वाली थीं. उनके वकील धर्मानंद देब के मुताबिक, उन्होंने 1987 में बांग्लादेश के हबीगंज जिले के पराई गांव के निवासी अभिमन्यु दास से शादी की थी. शादी के एक साल बाद 1988 में यह कपल भारत आ गया और असम के कछार जिले में रहने लगा.
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उनकी नागरिकता पर पहली बार 2013 में सवाल उठा, जब पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की. 2 जुलाई 2013 को पुलिस ने एक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कहा गया था कि देपाली दास बांग्लादेश के बानियाचोंग क्षेत्र की रहने वाली हैं और मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था.
खास बात यह है कि यही चार्जशीट बाद में उनकी नागरिकता के आवेदन में अहम सबूत बन गई. वकील धर्मानंद देब के अनुसार, CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करते समय यह साबित करना जरूरी होता है कि व्यक्ति बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से भारत आया है.

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