
कभी परमाणु हमलों से तबाह हुए शहर में आज पहुंचेंगे PM मोदी, जानिए- कैसा है अब हिरोशिमा
AajTak
पीएम नरेंद्र मोदी छह दिन की विदेश यात्रा पर रवाना हो गए हैं. वह सबसे पहले जापान के हिरोशिमा शहर जाएंगे. नरेंद्र मोदी ने यात्रा पर रवाना होने से पहले ट्वीट किया- मैं जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के निमंत्रण पर जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए हिरोशिमा जा रहा हूं." हिरोशिमा वह शहर है, जिसे अमेरिका ने 1945 में परमाणु बम गिराकर तबाह कर दिया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं. इन देशों में एक जापान भी है. पीएम रात में ही हिरोशिमा पहुंच जाएंगे. वह यहां जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. आज भी हिरोशिमा का नाम सुनते ही एक तस्वीर सामने आ जाती है... आसमान की ओर उठता विशाल धुएं-आग का गुबार और तबाह शहर. अब 78 साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी इस शहर में जा रहे हैं.
जापान पहुंचने के बाद पीएम मोदी शनिवार को सबसे पहले क्वाड सम्मेलन में शामिल होंगे. इसके बाद परमाणु बम के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने हिरोशिमा स्मारक जाएंगे. इसके अलावा महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. इसके बाद कोरिया, वियतनाम और अन्य देशों के नेताओं, राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी. इसके बाद रात में वह जापान के पीएम फुमियो किशिदा के साथ बैठक करेंगे फिर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में जाएंगे.
आइए जानते हैं परमाणु बम का दंश झेलने वाला हिरोशिमा अब किस हाल में है, वह कैसा दिखता है लेकिन उससे पहले यह जानते हैं कि हिरोशिमा पर अमेरिका ने कैसी तबाही मचाई थी.
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 की सुबह करीब 8:15 बजे अमेरिका के लड़ाकू विमान ने करीब 10 किलोमीटर की ऊंचाई से हिरोशिमा पर 'लिटिल बाय' परमाणु बम गिरा दिया था. 64 किलो यूरेनियम से बने इस बम को B-29 बॉम्बर (Enola Gay) में सवार मेजर टॉमस फेरेबी ने गिराया था.
लिटिल बॉय 3.5 मीटर लंबा, 4.3 टन वजन वाला नीले-सफेद रंग का था. इसे बेहद की गुप्त तरीके से मैनहटन प्रोजेक्ट के तहत न्यू मैक्सिको के लॉस अलामोस की लैब्स में बनाया गया था. इस बम की शक्ति 12500 टन टीएनटी के बराबर थी.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









