
एस जयशंकर ने मेक्सिको, साइप्रस और प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ की द्विपक्षीय वार्ता, रिश्ते मजबूर करने पर जोर
AajTak
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर मेक्सिको, साइप्रस और कई प्रशांत द्वीपीय देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. उन्होंने भारत की वैश्विक साझेदारी, साइप्रस विवाद समाधान और प्रशांत क्षेत्र से जुड़ाव की प्रतिबद्धता को दोहराया.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर मेक्सिको, साइप्रस और कई प्रशांत द्वीपीय देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं और वैश्विक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई.
सोशल मीडिया पर इन बैठकों की जानकारी साझा करते हुए जयशंकर ने बताया कि उन्होंने बुधवार को मेक्सिको के विदेश सचिव जुआन रेमन डे ला फुएंते से मुलाकात की. दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और एक नया रोडमैप तैयार करने पर सहमत हुए.
उन्होंने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस के साथ भी बातचीत की. इस दौरान दोनों नेताओं ने इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा के बाद से हुए प्रगति की समीक्षा की.
'कोम्बोस का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक...'
एस. जयशंकर ने कहा, "यूरोप के घटनाक्रमों पर उनकी अंतर्दृष्टि की सराहना करता हूं. संयुक्त राष्ट्र के सहमत ढांचे और प्रासंगिक यूएनएससी प्रस्तावों के मुताबिक साइप्रस समस्या के व्यापक और स्थायी समाधान के समर्थन की पुष्टि की. मैं कोम्बोस का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं."
यह भी पढ़ें: विदेश मंत्री एस जयशंकर 20-21 अगस्त को रूस जाएंगे, NSA डोभाल के बाद दूसरा हाई-लेवल दौरा

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









