
एनकाउंटर पॉलिटिक्स... डरावनी होती जा रही है जुर्म को लेकर त्वरित न्याय की मांग | Opinion
AajTak
बदलापुर एनकाउंटर से पहले यूपी में भी खूब राजनीति हुई. योगी आदित्यनाथ के शासन में जाति देखकर एनकाउंटर किये जाने का आरोप लगा, तो STF का बैलेंसिंग एक्ट भी अजीबोगरीब रहा - लेकिन ऐसे ही दौर में पश्चिम बंगाल में अलग ही मिसाल पेश की गई है.
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर को लेकर जबरदस्त राजनीति चल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आरोप है कि पुलिस यूपी में जाति देखकर एनकाउंटर कर रही है.
सुल्तानपुर डकैती केस में पहले मंगेश यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था, जिस पर खूब बवाल मचा. बाद में एसटीएफ ने उन्नाव में अनुज प्रताप सिंह को ढेर कर दिया. अनुज के पिता ने तो कहा कि अखिलेश यादव की इच्छा पूरी हुई, क्योंकि हिसाब बराबर हो गया - लेकिन अखिलेश यादव ने अनुज के एनकाउंटर का भी ये कहते हुए विरोध किया कि ये भी फर्जी एनकाउंटर है.
इस बीच बदलापुर रेप के आरोपी अक्षय शिंदे का भी एनकाउंटर हुआ है, जिस पर महाराष्ट्र में राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है. एक एनकाउंटर तो तमिलनाडु में भी हुआ है, मारे गये हिस्ट्रीशीटर बदमाश 'सीजिंग राजा' का नाम बीएसपी नेता आर्मस्ट्रांग की हत्या में भी आया था. वे एक दलित थे. इसी हत्या के एक और आरोपी कक्काथोपे बालाजी को हफ्ताभर पहले एक एनकाउंटर में मार दिया गया था.
ठोको नीति से होती हैं गैर-न्यायिक हत्या
पुलिस को एक्स्ट्रा पावर मिल जाये, तो उसे बेलगाम तो होना ही है. जब पुलिस की पीठ पर सीधे मुख्यमंत्री का हाथ हो, तो क्या होगा? ऐसे में कानून और कोर्ट भला क्या मायने रखता है? उत्तर प्रदेश में तो फिलहाल हाल यही है.
सवाल ये है कि पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आती ही क्यों है? हकीकत का एक हिस्सा ये तो है ही कि आरोपियों को पकड़ कर जेल भेज देने भर से कहां कुछ होता है. बलात्कार के ही कई मामलों में देखा गया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, और छूटते ही वो पीड़ित पर हमला करता है. कई मामले तो जलाकर मार डालने के भी सामने आ चुके हैं. यूपी के उन्नाव से ही एक ऐसा मामला देखा गया.

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि निजाम के 173 बहुमूल्य गहने 1995 से भारतीय रिजर्व बैंक के वॉल्ट में कड़ी सुरक्षा में रखे गए हैं. संस्कृति मंत्रालय ने इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत महत्व को स्वीकार किया है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन गहनों को हैदराबाद में स्थायी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए स्थानांतरित करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

Delhi Weather: दिल्ली में फरवरी की शुरुआत मौसम में बदलाव के साथ होगी. जिसमें हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा. IMD के अनुसार, 31 जनवरी से 3 फरवरी तक न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19-21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. जनवरी में असामान्य बारिश के बाद फरवरी की शुरुआत भी ठंडी और गीली रहने की संभावना है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?






