
एक देश-एक चुनाव पर गैर-NDA और गैर-INDIA पार्टियों का क्या है रुख? किसको फायदा-किसको नुकसान
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मोदी सरकार एक देश-एक चुनाव कराने पर आगे बढ़ चुकी है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया गया है. चर्चा है कि सरकार इसे लेकर संसद के विशेष सत्र में बिल ला सकती है. ऐसे में जानते हैं एक देश-एक चुनाव पर उन पार्टियों का रुख क्या है, जो न ही एनडीए का हिस्सा हैं और न ही विपक्षी गठबंधन इंडिया का.
पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक... सब एक-साथ कैसे कराए जा सकते हैं? इसे लेकर केंद्र सरकार ने एक कमेटी का गठन कर दिया है. कमेटी की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास है. इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह समेत आठ सदस्य हैं.
इस कमेटी का गठन करने से दो दिन पहले ही सरकार ने संसद के विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया था. ऐसी चर्चाएं हैं कि इस विशेष सत्र में 'एक देश-एक चुनाव' यानी 'वन नेशन-वन इलेक्शन' पर बिल आ सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक देश-एक चुनाव की अक्सर वकालत करते रहे हैं. बीजेपी समेत कई पार्टियां भी इसके समर्थन में हैं. लेकिन इसका विरोध भी हो रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर एक देश-एक चुनाव के लिए गठित कमेटी को 'नौटंकी' बताया. साथ ही आरोप लगाया कि मोदी सरकार धीरे-धीरे लोकतंत्र को 'तानाशाही' में बदलना चाहती है.
खड़गे ने पांच सितंबर को I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक भी बुलाई है. इस बैठक में संसद के विशेष सत्र में विपक्ष की रणनीति पर चर्चा होगी. संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा.
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने X पर पोस्ट किया 'देश के लिए क्या जरूरी है? वन नेशन-वन इलेक्शन या वन नेशन-वन एजुकेशन, वन नेशन-वन इलाज? आम आदमी को वन नेशन-वन इलेक्शन से क्या मिलेगा?'
विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. तो एक देश-एक चुनाव का खुलकर विरोध कर रहा है. वहीं, बीजेपी की अगुवाई वाले NDA में शामिल पार्टियां इसके समर्थन में हैं. लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी पार्टियां भी हैं जो न तो I.N.D.I.A. का हिस्सा हैं और न ही NDA का. ये वो पार्टियां हैं जिनकी संसद में अच्छी-खासी सीटें हैं और अगर एक देश-एक चुनाव पर बिल आता है तो इन्हें सरकार का समर्थन मिल सकता है.

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