
एक जमीन, तीन किरदार...10 मिनट में बढ़े करोड़ों में दाम... अयोध्या जमीन विवाद की Inside story
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समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए ज़मीन खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये को घोटाला हुआ है. रविवार को हुए इस खुलासे के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है.
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या में बन रहा राम मंदिर विवादों के घेरे में आ गया है. समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए ज़मीन खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये को घोटाला हुआ है. रविवार को हुए इस खुलासे के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है. पिछले साल अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन में हिस्सा लिया. सारी तैयारियां हो गई थीं, लगातार काम भी चल रहा था और अब सिर्फ इंतजार एक भव्य राम मंदिर का था. लेकिन इस बीच जिस ट्रस्ट पर मंदिर बनाने की जिम्मेदारी है, उसी पर एक आरोप लग गया. दस मिनट में जमीन के दाम करोड़ों में बढ़े... ये आरोप है जमीन खरीद में भ्रष्टाचार का. आरोपों के मुताबिक, 2 करोड़ की जमीन को ट्रस्ट ने साढ़े 18 करोड़ में खरीदा है. पहले जमीन की कीमत 2 करोड़ थी लेकिन महज 10 मिनट में ही डील पक्की हुई और वो कीमत हो गई साढ़े 18 करोड़. 10 मिनट के अंतराल में जमीन की कीमत साढ़े 16 करोड़ बढ़ गई. यानी प्रति सेकेंड साढ़े पांच लाख रुपये महंगी होती गई जमीन और 10 मिनटों में कीमत में 9 गुना इजाफा हो गया. इसी साल 18 मार्च को उस जमीन की दोनों डील हुई और दोनों डील में महज 10 मिनट का फर्क है. सबसे बड़ी बात कि दोनों डील में दोनों गवाह कॉमन हैं, उनमें एक नाम अनिल मिश्रा का है जो रामजन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य हैं. और दूसरा नाम है अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का, हालांकि ऋषिकेश उपाध्याय भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप से साफ साफ इनकार कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह तो जमीन की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं और सीबीआई जांच की मांग तक कर रहे हैं. तमाम सियासी सवालों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने इसे राजनीतिक आरोप बता दिया है.
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