
ईरान युद्ध पर तुर्की में सियासी घमासान, राष्ट्रपति एर्दोगन पर अमेरिका के प्रति नरमी का आरोप
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ईरान युद्ध पर तुर्की की सियासी खींचतान तेज गई है. मुख्य विपक्षी नेता ओजगुर ओजेल ने राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन पर आरोप लगाया है कि उनकी चुप्पी और अमेरिका के प्रति नरम रुख ने ईरान पर हो रहे हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दिया है. सरकार ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
ईरान में जारी युद्ध को लेकर तुर्की की घरेलू राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं. देश के मुख्य विपक्षी नेता ओजगुर ओजेल ने राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी चुप्पी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति नरम रवैया, ईरान पर हो रहे हमलों को बढ़ावा दे रहा है.
रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन ओजगुर ओजेल ने बुधवार को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन की विदेश नीति की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिश में एर्दोगन उनके नाम लेकर आलोचना करने से बच रहे हैं.
इस्तांबुल में ओजेल ने कहा, "तुर्की की चुप्पी, कोई कार्रवाई न करना और यहां कोई स्पष्ट रुख न अपनाना, असल में अमेरिका और इजरायल को बढ़ावा देता है." उन्होंने ईरान में एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले का भी जिक्र किया. युद्ध के पहले ही दिन हुए इस हमले में कई बच्चों की मौत हो गई थी.
ओजेल ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बावजूद तुर्की सरकार की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई. उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो कर रहे हैं, उसके सामने तुर्की की अजीब चुप्पी और उस बेहिसाब ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ स्टैंड न लेने की नाकामी, न्यूट्रैलिटी नहीं है."
हालांकि, राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने सार्वजनिक तौर पर कई बार युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक समाधान की अपील की है. उन्होंने यह भी कहा है कि तुर्की किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार है. विपक्षी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि ईरान एक अधिक लोकतांत्रिक देश बने.
वहां महिलाओं और मानवाधिकारों का सम्मान हो. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बदलाव का रास्ता वहां की आंतरिक परिस्थितियों से तय होना चाहिए. उनके मुताबिक ईरान में किसी भी सैन्य कार्रवाई को तभी उचित माना जा सकता है, जब वो एक अंतरराष्ट्रीय बल द्वारा स्पष्ट उद्देश्य के साथ हो.

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