
ईरान को बायपास कर UAE-ओमान बना सकते हैं नया होर्मुज स्ट्रेट, तेल का खेल ही पलट जाएगा!
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का असलियत में 11 किलोमीटर चौड़ा जलमार्ग ही कई देशों के लिए ईंधन सप्लाई का सबसे अहम मार्ग है. भू-राजनीतिक तनाव की वजह से जब जब ईरान नाराज होता है ये रास्ता बंद हो जाता है. इस रास्ते के एक और UAE है तो दूसरी ओर ओमान और नुकीले छोर पर है ईरान. आखिर UAE और ओमान इसका विकल्प क्यों नहीं तैयार करते.
फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' एशिया के कई देशों के लिए रणनीतिक और सामरिक रूप से सबसे अहम जलमार्ग है. दुनिया का लगभग पांचवें हिस्से का कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है और अलग अलग देशों तक पहुंचता है. फिर इस तेल की रिफाइनिंग होती है. उसके बाद ये तेल हमारे आपके कारों, बाइक में पहुंचता है और इसका दूसरा इस्तेमाल होता है.
Strait of Hormuz को दुनिया का सबसे अहम समुद्री चोक-पॉइंट माना जाता है. दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी संकरे जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. ऐसे में जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है. खासतौर पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तब यह सवाल उठने लगता है कि आखिर संयुक्त अरब अमीरात और ओमान मिलकर ऐसा कोई नया समुद्री रास्ता क्यों नहीं बना लेते जो होर्मुज' को बायपास कर दे. जब जब होर्मुज' का संकट पैदा होता है. इस सवाल पर चर्चा होती है.
आप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तस्वीर देखिए. इस तस्वीर को देखने से पता चलता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है. ये स्ट्रेट यानी कि पतला सा जलमार्ग अभी लगभग बंद है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की पश्चिमी दिशा में UAE है और पूर्वी ओर ओमान है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जो नुकीला हिस्सा है उस पर ओमान का मालिकाना हक है. अगर एक सामान्य व्यक्ति देखे तो उसे लग सकता है कि दोनों छोरों को काटकर बीच में एक नहर क्यों नहीं बनाई जा सकती है. ये नहर इतना चौड़ा हो कि इससे तेल के टैंकर आसानी से आवाजाही कर सकें.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: 11 KM में सारा खेल होता है
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहां सबसे संकरा है वहां उसकी चौड़ाई लगभग मात्र 39 किलोमीटर रह जाती है. यह ईरान और ओमान के बीच का सबसे तंग हिस्सा है. जहाजों के चलने वाले असली रास्ते के लिए यहां Traffic Separation Scheme (TSS) लागू है. इसके तहत आने वाले जहाजों को 2 मील चौड़ा रास्ता चाहिए, जबकि जाने वाले जहाजों को भी 2 मील चौड़ा रास्ता चाहिए और इन दोनों जहाजों के बीच 2 मील का गैप होता है. यानी कुल उपयोगी रास्ता सिर्फ 6 मील (लगभग 11 किलोमीटर) का है. बाकी चौड़ाई में बड़े टैंकर नहीं चलते क्योंकि यहां गहराई कम है. इसलिए बड़े जहाजों के भूतल से टकराने का खतरा ज्यादा है.

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

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