
इजरायली सरजमीं से मोदी ने पेश किए 5 पावर पाॅइंट, असर गाजा और कश्मीर से परे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायली संसद Knesset में दिया गया भाषण सिर्फ दो देशों की रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं था. इजरायल के साथ भावनात्मक जुड़ाव की बातें करने से पहले पीएम मोदी दोनों देशों के सामने मौजूद रक्षा चुनौतियों के बारे में बता रहे थे. इस दौरान वे बेहद सख्त और निर्णायक रहे. उनके भाषण ने सिर्फ इजरायल और भारत ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल-ईस्ट के लिए एजेंडा सेट कर दिया.
इजरायल की संसद Knesset में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले तो वह सिर्फ एक औपचारिक संबोधन नहीं था. वह एक साफ संदेश था. आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं. कट्टरपंथ के लिए कोई जगह नहीं. और सुरक्षा के सवाल पर भारत और इजरायल साथ खड़े हैं.
करीब आधे घंटे के भाषण में मोदी ने पांच बड़े संकेत दिए. इन संकेतों ने यह साफ कर दिया कि भारत-इजरायल रिश्ते अब सिर्फ दोस्ती नहीं रहे. यह एक पक्की रणनीतिक साझेदारी है. एक पार्टनरशिप है. जिसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया पर दिखेगा.
पहला पावर पॉइंट: आतंकवाद पर बिना शर्त सख्ती
मोदी ने साफ कहा कि आतंकवाद को किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया जा सकता. यह बात उन्होंने सीधे और बिना घुमाए कही. सीधे हमास का नाम लिया. उसकी दरिंदगी को अंडरलाइन किया. इजरायल ने हाल के सालों में जिस तरह के हमले झेले हैं, उसका जिक्र हुआ. भारत ने भी दशकों तक आतंक झेला है. दोनों देशों का दर्द अलग नहीं है.
यह संदेश सिर्फ इजरायल के लिए नहीं था. यह दुनिया के लिए था. भारत अब आतंकवाद पर संतुलन की भाषा नहीं बोल रहा. साफ शब्दों में कह रहा है कि यह मानवता के खिलाफ अपराध है.
दूसरा पावर पॉइंट: कट्टरपंथ को जड़ से खत्म करने की जरूरत

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