
इजरायली संसद में PM मोदी के भाषण से क्यों चिढ़ी मुस्लिम देशों की मीडिया?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे और नेसेट में दिए गए ऐतिहासिक भाषण ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. जहां इजरायली मीडिया ने इसे मजबूत रणनीतिक साझेदारी का संकेत बताया, वहीं मुस्लिम देशों की मीडिया ने इसे फिलिस्तीन मुद्दे से दूरी के रूप में देखा. पीएम मोदी के दौरे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं साफ तौर पर बंटी नजर आईं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल दौरे के पहले दिन इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए भारत-इजरायल संबंधों को नई दिशा देने का संदेश दिया. यह पहला मौका था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नेसेट में भाषण दिया और उन्हें 'मेडल ऑफ द नेसेट' से सम्मानित किया गया. अपने संबोधन में उन्होंने तीन मुख्य बातों पर जोर दिया - आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक रिश्ते और भविष्य में तकनीक और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी.
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास के हमलों को 'बर्बर' बताते हुए कहा कि भारत इजरायल के दुख में उसके साथ खड़ा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "कोई भी कारण नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकता. कुछ भी आतंकवाद को जायज नहीं ठहरा सकता." उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का सामना करता आया है और उसकी नीति "आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस" की रही है.
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पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में अब्राहम एकॉर्ड्स की भी सराहना की और कहा कि जब ये समझौते हुए थे, तब भारत ने आपके साहस और दूरदृष्टि की सराहना की थी. उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति काफी बदल चुकी है और शांति का रास्ता अब पहले से ज्यादा कठिन हो गया है. उन्होंने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की बात दोहराई और I2U2 (इंडिया-इजरायल, यूनाइटेड स्टेट-यूएई) और IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) जैसे मंचों के जरिए सहयोग बढ़ाने की अपील की.
पीएम मोदी के भाषण को इजरायल में कैसे देखा जा रहा
इजरायल की विदेश मामलों की एक्सपर्ट लॉरेन डैगन अमोस के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का नेसेट में दिया गया भाषण सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सोच-समझकर दिया गया राजनीति और सुरक्षा से जुड़ा संदेश था. उन्होंने कहा कि आम तौर पर हिंदी में बोलने की अपनी पसंद के बजाय मोदी ने अंग्रेजी में भाषण दिया, ताकि उनका संदेश सिर्फ इजरायल तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों तक भी पहुंचे.

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