
इजराइल: लैपिड ने मानी हार, नेतन्याहू का दोबारा PM बनना तय, 5वीं बार संभालेंगे पद
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इजराइल में आम चुनाव के नतीजे लगभग स्पष्ट होते नजर आ रहे हैं. बेंजामिन नेतन्याहू के दोबारा प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग तय हो गया है. उन्हें लगातार टक्कर दे रहे प्रतिद्वंद्वी यैर लैपिड ने भी हार स्वीकार कर ली है.
इजराइल में आम चुनाव के नतीजे लगभग स्पष्ट होते नजर आ रहे हैं. बेंजामिन नेतन्याहू के दोबारा प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. वे पांचवी बार इजराइल के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालेंगे. उन्हें लगातार टक्कर दे रहे वर्तमान प्रधानमंत्री और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी यैर लैपिड ने भी अपनी हार स्वीकार कर ली है. बताया जा रहा है कि नेतन्याहू के गठबंधन को 120 में से 64 सीटें मिलने की प्रबल संभावना है.
टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक लैपिड ने नेतन्याहू को फोन कर जीत की बधाई भी दी. लैपिड ने नेतन्याहू से कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के सभी विभागों को सत्ता व्यवस्थित तरीके से ट्रांसफर करने की तैयारी के निर्देश दिए हैं.
दरअसल, इजराइल की संसद में 120 सीटें हैं. नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगियों के इनमें से 64 सीटें जीतने का अनुमान है. बता दें कि इजराइल की राजनीति पूरी तरह से गठबंधन पर आधारित है. यहां कोई भी एक पार्टी संसद में कभी बहुमत हासिल नहीं कर पाती है. इसलिए सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों की मदद लेना ही पड़ता है.
नतीजे पूरे होने से पहले ही नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी के चुनाव मुख्यालय में अपने समर्थकों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हम एक बहुत बड़ी जीत के कगार पर हैं. इजराइल में 2019 के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है. यहां सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू को रिश्वेतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगने के बाद अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. इस चुनाव में नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी यैर लैपिड थे. इन्होंने ही नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए पूरी बिसात बिछाई थी.
इजरायल में कैसे होता है चुनाव?
120 सीटों वाले इजरायल चुनाव में जिस भी पार्टी के पक्ष में वोटर टर्नआउट ज्यादा रहता है, उसकी जीतने की उम्मीद ज्यादा बन जाती है. असल में इजरायल में जनता कभी भी किसी उम्मीदवार के लिए वोट नहीं करती है, उनकी तरफ से पार्टी को वोट दिया जाता है. अगर संसद में किसी को भी सीट चाहिए होती है तो नेशनल वोट का कम से कम 3.25% चाहिए ही होता है. यानी कि इजरायल में प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन वाली चुनावी व्यवस्था चलती है, जहां पर जिस पार्टी को जितना वोट मिलेगा, उसी के हिसाब से उसे सीटें भी मिलेंगी.

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