
आस्था, आरोप और इंतजार... वैज्ञानिक जांच के लिए सबरीमाला पहुंची SIT, फिर से जुटाए जाएंगे सैंपल
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केरल के सबरीमाला मंदिर में सोने की परत गायब होने के आरोपों की जांच तेज हो गई है. हाईकोर्ट की अनुमति के बाद SIT वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नए सैंपल जुटाने के लिए मंदिर पहुंची है. इस जांच की रिपोर्ट 19 फरवरी को कोर्ट में दाखिल होगी. पढ़े पूरा मामला.
Sabarimala Gold Loss Case: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में लगे सोने की परत को लेकर विवाद चल रहा है. आरोप है कि मंदिर के कुछ पवित्र हिस्सों से सोने की परत गायब हो गई है. यही वजह है कि अब इस मामले की जांच तेज हो चुकी है. गुरुवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT पहाड़ी मंदिर पहुंची. इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विज्ञान की कसौटी पर सच्चाई को परखा जाएगा. भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले ने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
पंपा से सन्निधानम तक जांच की यात्रा पुलिस सूत्रों के मुताबिक एसपी एस. ससिधरन की अगुवाई में SIT सुबह पंपा बेस कैंप पहुंची. पंपा से टीम दोपहर तक सन्निधानम के लिए रवाना हुई. यह वही स्थान है जहां मंदिर का मुख्य गर्भगृह स्थित है. जांच टीम की हर गतिविधि पर प्रशासन और अदालत की नजर है. टीम का उद्देश्य साफ है- तथ्यों को वैज्ञानिक तरीके से परखना. इस बार कोई भी पहलू अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा.
हाईकोर्ट से मिली नई अनुमति दरअसल, सोमवार को केरल हाईकोर्ट ने SIT को दोबारा सैंपल इकट्ठा करने की अनुमति दी थी. अदालत ने माना कि केवल गवाही या दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई तय नहीं की जा सकती. सोने की परत हटाने और बदलने जैसे गंभीर आरोप मंदिर की पवित्रता से जुड़े हैं. इसलिए वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है. अदालत ने साफ कहा कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए आधुनिक फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य है.
कब लिए जाएंगे सैंपल? सूत्रों के अनुसार सबरीमाला मंदिर गुरुवार शाम 5 बजे मासिक पूजा के लिए खुलेगा और 17 फरवरी रात 10 बजे बंद होगा. SIT दिनभर की पूजा समाप्त होने के बाद सैंपल इकट्ठा करेगी. यानी धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू होगी. प्रशासन इस बात का ध्यान रख रहा है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस न पहुंचे. जांच और आस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
किन हिस्सों से गायब हुआ सोना? SIT दो मामलों की जांच कर रही है. पहला मामला द्वारपालक प्रतिमा की प्लेटों से सोने की कथित कमी से जुड़ा है. दूसरा मामला श्रीकोविल यानी गर्भगृह के दरवाजों के फ्रेम से जुड़ा है. आरोप है कि इन हिस्सों पर चढ़ी सोने की परत में बदलाव हुआ है. कितनी मात्रा में सोना कम हुआ, क्या उसे बदला गया, और अगर हां तो कब? इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं.
विज्ञान बनेगा सबसे बड़ा गवाह SIT ने अदालत को बताया था कि सच्चाई जानने के लिए उन्नत वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी हैं. टीम X-Ray Fluorescence Spectroscopy (XRF) से सतह की संरचना जांचेगी. Inductively Coupled Plasma Mass Spectrometry (ICP-MS) से सूक्ष्म तत्वों की पहचान होगी. Optical Emission Spectroscopy (OES) से मिश्रधातु की एकरूपता का परीक्षण किया जाएगा. इन तकनीकों से यह साफ हो सकेगा कि मूल रूप से कितना सोना था और बाद में कितना कम हुआ.

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