
आने वाला है CUET UG का रिजल्ट, जानिए इसके बाद क्या होगा अगला स्टेप
AajTak
कटऑफ जारी करने के बाद काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. काउंसलिंग के दौरान च्वॉइस फिलिंग या प्रेफरेंस भरना, सीट अलॉटमेंट और कॉलेज एडमिशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी. जेएनयू, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत सभी विश्वविद्यालय अपनी अलग-अलग काउंसलिंग आयोजित कराएंगे.
CUET UG 2025: इस साल सीयूईटी की परीक्षा दे चुके छात्रों को अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार है. अनुमान है कि परिणाम इसी हफ्ते घोषित कर दिए जाएंगे. इस परीक्षा में पास होने वाले स्टूडेंट्स देश के उन नामी संस्थानों में दाखिला ले पाएंगे, जहां एडमिशन सीयूईटी स्कोर के जरिए होता है. ऐसे में परिणाम जारी होने से पहले आइए जानते हैं कि सीयूईटी का परिणाम जारी होने के बाद अगला स्टेप क्या होगा.
ग्रेजुएशन में एडमिशन के लिए सीयूईटी पास करने वाले स्टूडेंट्स आगे के एडमिशन प्रोसेस का हिस्सा बन सकते हैं. रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स को सबसे पहले काउंसलिंग पूरी करनी होगी. कैंडिडेट्स को डीयू, जेएनयू आदि यूनिवर्सिटीज के एडमिशन फॉर्म को भरना होगा. इसके लिए सभी यूनिवर्सिटीज अपनी वेबसाइट पर नोटिफिकेशन जारी करती हैं.
इस फॉर्म में कैंडिडेट्स को अपना सीयूईटी स्कोर, स्कोरकार्ड और सीयूईटी रोल नंबर भी दर्ज करना होता है. इसके अलावा यूनिवर्सिटीज भी अलग-अलग कोर्स की कट-ऑफ जारी करती हैं. हाई कट-ऑफ और कुल सीट्स के आधार पर छात्रों को एडमिशन मिलता है.
कटऑफ जारी करने के बाद काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. काउंसलिंग के दौरान च्वॉइस फिलिंग या प्रेफरेंस भरना, सीट अलॉटमेंट और कॉलेज एडमिशन जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी. जेएनयू, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत सभी विश्वविद्यालय अपनी अलग-अलग काउंसलिंग आयोजित कराएंगे.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में क्या है एडमिशन की प्रक्रिया
दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिला लेने के लिए स्टूडेंट्स को डीयू की वेबसाइट पर जाकर CSAS के लिए अप्लाई करना होता है. इसके बाद सीयूईटी एप्लीकेशन नंबर से लॉगइन करना होगा फिर ये पोर्टल खुल जाएगा. अप्लाई करने के बाद आप कौन-सा कोर्स करना चाहते हैं इसकी जानकारी भरनी होगी. इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद एडमिशन दिया जाएगा. डीयू के टॉप कॉलेज में कटऑफ हाई जाती है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












