
आत्मा का वजन कितना है, क्या दोबारा हो सकते हैं जिंदा? पढ़िए इंसानों पर किए गए 4 खतरनाक एक्सपेरिमेंट्स
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आपने जानवरों पर साइंस के एक्सपेरिमेंट किए जाने के बारे में सुना होगा. कुत्ते, बंदर और चूहों पर कई तरह के साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट किए जाते हैं. मगर, इतिहास में ऐसा भी दौर आया, जब कुछ सनकी वैज्ञानिकों ने इंसानों पर ही रूह कंपा देने वाले प्रयोग किए. आज हम आपको ऐसे ही कुछ किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
इतिहास में कुछ ऐसे भी वैज्ञानिक रह चुके हैं, जिन्होंने जानवरों पर नहीं इंसानों पर ही साइंस के एक्सपेरिमेंट कर डाले. कुछ घटनाएं ऐसी हुईं, जिन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे. आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या वैज्ञानिक इस हद तक भी जा सकते हैं? तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही एक्सपेरिमेंट्स के बारे में जिन्हें रोकने के लिए कई देशों की सरकार तक को आगे आना पड़ा.
आत्मा का वजन कितना? अमेरिका में 1907 में डॉक्टर डंकन मैकडोगल (Dr. Duncan Macdougall) ने आत्मा का वजन नापने के लिए एक्स्पेरिमेंट किया. इसके लिए उन्होंने 6 ऐसे मरीजों को चुना जिनकी जल्द ही मौत होने वाली थी. या यूं कहें कि वे मरने की हालत में ही थे. उन सभी को वेट स्केल पर लेटाकर पहले उनका वजन नापा गया. ताकि मरने के तुरंत बाद पता लग सके कि आत्मा का वजन कितना है.
दरअसल, धार्मिक मान्यता के अनुसार यह माना जाता है कि मरने के बाद हमारी आत्मा शरीर को त्याग देती है. बस इसी को लेकर डॉक्टर डंकन ने सोचा कि जैसे ही किसी मरीज की मौत होगी, तुरंत उसका वजन नापा जाएगा. फिर पहले वाले वजन से उस वजन को घटा दिया जाएगा. फिर उससे आसानी से पता लग जाएगा कि आत्मा का वजन कितना होता है.
पहले पेशेंट के वजन में 21 ग्राम की कमी आई. दूसरे पेशेंट का वजन मरने के तुरंत बाद कम तो हुआ, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उनका वजन पहले जैसा ही हो गया. दो अन्य पेशेंट्स के वजन में भी कमी आई. लेकिन थोड़ी ही देर बाद दोनों का वजन पहले से थोड़ा ज्यादा बढ़ गया. जबकि एक पेशेंट की मौत मशीनों को सेट करने के दौरान ही हो गई. इससे उसके वजन का पता नहीं लग पाया.
वहीं, आखिरी पेशेंट के वजन में मौत के बाद कोई बदलाव नहीं आया. लेकिन एक मिनट के बाद उसका वजन 28 ग्राम कम हो गया. इस प्रयोग में सभी के वजन का अंतर अलग-अलग होने के कारण ये बात साबित नहीं हो पाई कि आत्मा जैसी कोई चीज होती है.
बाद में वैज्ञानिक ने बताया कि मरने के बाद वजन में बदलाव शरीर में हुए कुछ बदलावों के कारण होता है. जैसे ब्लड क्लॉटिंग होना, फेफड़ों से आखिरी सांस का बाहर आना, केमिकल रिएक्शन द्वारा उत्पन्न गैसों का शरीर छोड़ना आदि. इस प्रयोग का पता जब सरकार को लगा तो इस प्रयोग पर रोक लगा दी गई.

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