
आखों का डॉक्टर, कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड, देखें कितना खतरनाक था जवाहिरी
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ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद अल जवाहिरी अमेरिका का दुश्मन नंबर एक था. 9/11 हमले के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन इसके अलावा भी जवाहिरी ने अमेरिकी सैनिकों, राजनयिकों पर हमलों को अंजाम दिया. इनमें सबसे अहम था 12 अक्टूबर 2000 को यमन में अमेरिकी जहाज यूएसएस कोल पर हमला. इसे हमले में अमेरिका के 17 नौसैनिक मारे गए थे और 30 घायल हुए थे. इससे करीब दो साल पहले 7 अगस्त, 1998 को अलकायदा ने केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावास पर बम हमला किया. इन हमलों में 224 लोग मारे गए थे और 5,000 से अधिक लोग घायल हो गए थे. देखें अल जवाहिरी के आतंकी वारदात की फाइल.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









