
आखिर कितना गहरा है समुद्र... क्यों अंतरिक्ष से भी ज्यादा है खतरनाक? इन वजहों से गहरे पानी में जाने से बचते रहे वैज्ञानिक
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पनडुब्बी से टाइटैनिक का मलबा देखने गए लोगों की गहरे समंदर में रहस्यमयी मौत हो गई. अब तक सिर्फ अंदा्जा लगाया जा रहा है कि हादसा कैसे हुआ होगा. इसके साथ ही एक बार फिर ये बात होने लगी है कि समुद्र अब तक क्यों स्पेस से ज्यादा रहस्य लिए हुए है. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, साल 2022 तक दुनिया में 20% ही सीफ्लोर ही देखा गया है.
इंसान चंद्रमा से लेकर मंगल तक पहुंच चुका. यहां तक कि दूसरे ग्रहों पर कॉलोनी बसाने की बात हो रही है, लेकिन अपनी ही धरती पर मौजूद समुद्र अब तक अछूता पड़ा है. एक्सपर्ट अक्सर ये बात मानते हैं कि समुद्र की गहराई को मापना अंतरिक्ष में जाने से कहीं ज्यादा रहस्यों से भरा और कई गुना ज्यादा खतरनाक है. आखिर वो कौन-सी चीज है, जो समुद्र को इतना जानलेवा बनाए हुए है?
कहां और कितना समय बिता चुके एक्सपर्ट
अब तक 12 एस्ट्रोनॉट्स कुल 300 घंटे चंद्रमा की जमीन पर बिता चुके हैं, जिसकी दूरी पृथवी से लगभग 4 लाख किलोमीटर है. वहीं समुद्र के सबसे गहरे तल पर 3 लोग मिलकर लगभग 3 घंटे ही रह सके. समुद्र की इस गहराई को चैलेंजर डीप कहते हैं.
सबसे गहरा समंदर कहां है?
वुड्स होल ओशनग्राफिक के अनुसार, समंदर की औसत गहराई करीब 12 हजार फीट है. वहीं इसके सबसे गहरे हिस्से को चैलेंजर डीप कहते हैं. ये जगह प्रशांत महासागर के नीचे मारियाना ट्रेंच के दक्षिणी छोर पर है. ये लगभग 36 हजार फीट गहरा है. साल 1875 में पहली बार इसका पता लगा. तबसे इसके करीब जाने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार नाकामयाब रहीं.
कैसा है चैलेंजर डीप?

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