
आखिरी सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव के भारत के साथ कैसे थे रिश्ते? राजीव गांधी से खास थी केमिस्ट्री
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सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव का 91 साल की उम्र में निधन हो गया. शीत युद्ध के समाप्त होने से गोर्बाचेव के भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने में विशेष भूमिका अदा की. गोर्बाचेव का भारत से विशेष नाता रहा. वह अपने कार्यकाल में दो बार भारत दौरे पर आए. भारत का यह दौरा ऐतिहासिक था क्योंकि सोवियत संघ के शीर्ष पद तक पहुंचने के बाद गोर्बाचेव पहली बार किसी एशियाई देश पहुंचे थे.
सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव का 91 साल की आयु में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. गोर्बाचेव को अमेरिका के साथ शीत युद्ध समाप्त करने का श्रेय दिया जाता है. शीत युद्ध की समाप्ति ने सोवियत के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने में विशेष भूमिका अदा की. गोर्बाचेव का भारत से विशेष नाता रहा है. वह अपने कार्यकाल में दो बार भारत दौरे पर आए. उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी से उनकी दोस्ती किसी से छिपी हुई नहीं है.
उन्होंने 1986 और 1988 में भारत का दौरा किया था. 1986 में गोर्बाचेव का पहला भारत दौरा एशिया में भूराजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण था. क्योंकि उस समय अमेरिका की पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ती जा रही थीं. इस दौरान गोर्बाचेव के साथ 100 सदस्यों का व्यापक प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था. उस समय राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री थे. गोर्बाचेव ने राजीव गांधी के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया और परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता भी जताई.
भारत का यह दौरा ऐतिहासिक था क्योंकि सोवियत संघ के शीर्ष पद तक पहुंचने के बाद गोर्बाचेव पहली बार किसी एशियाई देश पहुंचे थे.
गोर्बाचेव ने भारत दौरे पर संसद को संबोधित किया
गोर्बाचेव ने 1986 और 1988 में भारत के दौरे किए. उन्होंने कहा था कि जब वह 1986 में भारत गए थे, उस समय उनकी यात्रा का उद्देश्य परमाणु निरस्त्रीकरण की उनकी पहल को यूरोप से एशिया तक ले जाना है. गोर्बाचेव ने कहा था कि इस काम के लिए भारत का सहयोग जरुरी है. इसी दौरे के दौरान गोर्बाचेव ने भारत की संसद को संबोधित भी किया था. उनके इस संबोधन को भारत और सोवियत की प्रेस में व्यापक कवरेज मिली थी और इसे भारत की डिप्लोमेसी में मीला का पत्थर माना जाने लगा था. गोर्बाचेव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में गांधी ने कहा था, जब दोस्त आते हैं तो हमारे दिल खुशी से झूम उठते हैं. हम हमारे बीच आपको पाकर खुश हैं.
गोर्बाचेव के 1986 के भारत दौरे के दौरान ही राजीव गांधी से चर्चा के बाद दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया था, जिसमें वैश्विक शांति बहाल करने सहित सहयोग बढ़ाने का हवाला दिया गया था. घोषणापत्र में भारत और सोवियत संघ की परमाणु हथिार मुक्त और अहिंसक दुनिया की प्रतिबद्धता का हवाला दिया गया था.

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