
असम में AQIS में भर्ती, कट्टरपंथ से संबंधित मामले में 2 दोषी करार
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गुवाहाटी की एनआईए की विशेष अदालत ने गुरुवार को आतंकवादी ग्रुप एक्यूआईएस से संबंध अंसारुल्ला बांग्ला (ABT) के एक मॉड्यूल को खड़ा करने के लिए युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथ से संबंधित एक मामले में दो को दोषी ठहराया है. शनिवार को दोनों की सजा पर सुनवाई होनी है.
आतंकवादी ग्रुप एक्यूआईएस से संबंध अंसारुल्ला बांग्ला (ABT) के एक मॉड्यूल को खड़ा करने के लिए युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथ से संबंधित एक मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने दो लोगों को दोषी ठहराया है. दोषियों के खिलाफ शनिवार को सुनवाई की जाएगी.
सितंबर में NIA ने शुरू की थी जांच एनआईए ने अपने एक बयान में कहा कि असम के जिला गोलपारा के जलालुद्दीन शेख और अब्दुस सुभान ने 22 अगस्त, 2022 को असम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध को स्वीकार किया था और इसी साल 26 सितंबर को NIA द्वारा इसे अपने कब्जे में ले लिया था. एनआईए की जांच से पता चला है कि जलालुद्दीन ने अब्दुस सुभान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए थे, जिसने बाद में एबीटी के फरार हैंडलर, मेहबूब अलोम के साथ संबंध स्थापित किए और आतंक संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एबीटी/एक्यूआईएस में तीन अन्य लोगों को भर्ती किया.
आतंकवादी संगठन में भर्ती किए गए तीन लोगों की पहचान अब्दुस सुभान और हफीजुर रहमान के रूप में की गई, जिन्हें आरसी- 03/2022/एनआईए-जीयूडब्ल्यू मामले में आरोपी के रूप में भी नामित किया गया था, इसके अलावा एक अन्य का नाम अजमल हुसैन था.
लोगों को भर्ती करने के लिए करते थे सभाएं आरोपियों और अन्य सह-षड्यंत्रकारियों ने मॉड्यूल के संचालकों जैसे अबू तलहा, मेहबूब सुल्तान, जहांगीर अलोम अली नूर इनामुल हक, अमीनुल इस्लाम मेहदी हसन और सैफुल इस्लाम मोहम्मद सुमन के साथ मिलकर काम किया थो. जो बांग्लादेश में सीमा पार स्थित थे. वे प्रभावशाली लोगों को कट्टरपंथी बनाने और एबीटी/एक्यूआईएस में भर्ती करने के लिए असम के गोलपारा जिले में विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित करते थे.
30 को दाखिल किया था आरोप पत्र
एनआईए ने 30 जनवरी 2023 को मामले में आईपीसी की धारा 120बी और यूए (पी)ए अधिनियम, 1967 की धारा 18, 18बी, 38 और 39 के तहत छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. विशेष एनआईए अदालत ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी और यूए (पी) अधिनियम 1967 की धारा 38 और 39 के तहत आरोप तय किए थे. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है.

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