
अल अक्सा मस्जिद हिंसा: इजरायल के खिलाफ एकजुट हुए इस्लामिक देश
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अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली सुरक्षा बलों और फिलीस्तीनियों के बीच हिंसक झड़प हुई है. इस झड़प में दर्जनों फिलीस्तीनियों के घायल होने की खबर है. कई इस्लामिक देशों ने हिंसा की कड़ी निंदा की है.
यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में फिलीस्तीनियों और इजरायली सुरक्षा बलों के बीच सोमवार को एक बार फिर से झड़प हुई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीस्तीनी प्रदर्शनकारियों के पथराव के जवाब में इजरायली सुरक्षा बलों ने रबर बुलेट का इस्तेमाल किया. इस झड़प में दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए. साल 1967 में इजरायल ने यरुशलम के कई हिस्सों को अपने नियंत्रण में लिया था. सोमवार को इस घटना की वर्षगांठ के मौके पर यहूदी राष्ट्रवादी एक मार्च निकालने वाले थे. इसी बीच हिंसा भड़क उठी. फिलीस्तीनी रेड क्रीसेंट सोसायटी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि झड़प के दौरान 180 फिलीस्तीनी घायल हो गए हैं, जिनमें से 80 की हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इजरायली सुरक्षा बलों ने मस्जिद परिसर में इकठ्ठा लोगों पर ग्रेनेड और आंसू के गोले भी दागे.
अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








