
अमेरिकी EB-5 वीजा का ही नया रूप है ट्रंप की 'गोल्ड कार्ड' स्कीम, फीस 5 गुनी हो गई, समझें पूरी कहानी
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डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में 'गोल्ड कार्ड' स्कीम लेकर आए हैं. इस स्कीम के तहत दुनिया के किसी भी मुल्क में रह रहा शक्स 5 मिलियन डॉलर अमेरिका में निवेश करके गोल्ड कार्ड हासिल कर सकता है. हालांकि, यह स्कीम नई नहीं है. इससे पहले इसे EB-5 वीजा के तौर पर चलाया जाता था.
अमेरिकी लेखक 'जेम्स ट्रुसलो एडम्स' ने 1931 में 'एपिक ऑफ अमेरिका' नामक एक किताब लिखी, जिसमें उन्होंने 'अमेरिकन ड्रीम' को दुनिया के सबसे सुनहरे ख्वाब की तरह परिभाषित किया. ऐसा ख्वाब जिसमें अमेरिका को जमीन का एक ऐसा टुकड़ा बताया गया, जहां काबिलियत के दम पर बेहतर जिंदगी की उम्मीद मुमकिन है और जहां सभी को अपनी काबिलियत साबित करने का मौका भी मिलता है.
पिछले 94 साल में यूएस अपना 'अमेरिकन ड्रीम' अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को बेच चुका है. दरअसल, अमेरिका EB-5 वीजा नाम की एक स्कीम चलाकर विदेशी अमीरों को आकर्षित करता था और हर साल हजारों की तादाद में दुनियाभर के करोड़पति एक छोटा सा निवेश करके अमेरिकी ग्रीन कार्ड हासिल कर लेते थे. यह कार्ड मिलने के बाद कोई भी अमेरिका में लंबे समय तक रह सकता है.
अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने EB-5 वीजा के लिए निवेश की जाने वाली रकम को 5 गुना तक बढ़ा दिया है. आइए आपको बताते हैं कि पुराना EB-5 वीजा क्या था, इसके लिए कितनी रकम चुकानी होती थी और अब नए 'गोल्ड कार्ड' के लिए कितना निवेश करना होगा.
कैसे मिलता था EB-5 वीजा?
अमेरिकी सरकार के पुराने EB-5 वीजा को हासिल करने के लिए अमेरिका के किसी भी क्षेत्र में 1.05 मिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट करना होता था. भारतीय पूंजी में बात की जाए तो 9 करोड़ रुपए के आसपास अमेरिकी बाजार में निवेश करना होता था.
> इन्वेस्टमेंट के जरिए अमेरिका में कोई बिजनेस शुरू करना होता था.

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