
अमेरिकी हमले के डर से किलाबंदी में जुटा ईरान! परमाणु ठिकानों को छिपाने की सैटेलाइट तस्वीरें आईं सामने
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इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के नए सैटेलाइट एनालिसिस के मुताबिक, ईरान अपने जरूरी न्यूक्लियर ठिकानों को तेजी से कंक्रीट और मिट्टी के नीचे छिपाने में जुटा है. उन्हें मजबूत बंकरों में तबदील किया जा रहा है ताकि अमेरिकी द्वारा किसी भी तरह के हवाई हमलों से इन्हें बचाया जा सके.
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है. एक्सपर्ट्स दावा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में किसी भी समय युद्ध शुरू हो सकता है, जो कई हफ्तों तक चलेगा. इस सबके बीच ईरान ने अपने सबसे संवेदनशील सैन्य और परमाणु ठिकानों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर किलाबंदी शुरू कर दी है. वहीं दूसरी ओर जिनेवा में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है.
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के नए सैटेलाइट एनालिसिस के मुताबिक, ईरान अपने जरूरी न्यूक्लियर ठिकानों को तेजी से कंक्रीट और मिट्टी के नीचे छिपाने में जुटा है. उन्हें मजबूत बंकरों में तबदील किया जा रहा है ताकि अमेरिकी द्वारा किसी भी तरह के हवाई हमलों से इन्हें बचाया जा सके.
रिपोर्ट के मुताबिक जिन ठिकानों को 2024 में इजरायल और बाद में अमेरिका ने निशाना बनाया था, वहां अब निर्माण और सुरक्षा मजबूत करने का काम तेज कर दिया गया है. इंस्टीट्यूट ने अपने नए असेसमेंट में कहा, 'पिछले दो से तीन हफ़्तों से ईरान पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में नई तालेघन 2 फैसिलिटी को मिट्टी से दबाने में व्यस्त है.'
पारचिन सैन्य परिसर में नया निर्माण
तेहरान से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स के अंदर तालेघन 2 फैसिलिटी में 13 फरवरी की सैटेलाइट इमेज में मेन स्ट्रक्चर के चारों ओर एक पूरा कंक्रीट का ढांचा नजर आता है. अब इसके ऊपर मिट्टी डाली जा रही है. ISIS के अध्यक्ष डेविड अलब्राइट ने चेतावनी दी है कि यह केंद्र जल्द ही एक 'अदृश्य बंकर' बन जाएगा, जिस पर हवाई हमलों का असर न के बराबर होगा.

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भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

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क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.








