
अमेरिका में फिर मास शूटिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में ताबड़तोड़ फायरिंग ने ली 3 लोगों की जान
AajTak
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने तीन लोगों की जान ले ली है. इस हमले में कई लोग घायल भी बताए जा रहे हैं. अभी तक हमलावर पकड़ा नहीं गया है और उसकी तलाश जारी है.
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने तीन लोगों की जान ले ली है. इस हमले अब तक दो लोग घायल भी बताए जा रहे हैं. अभी तक हमलावर पकड़ा नहीं गया है और उसकी तलाश जारी है.
बताया जा रहा है कि रविवार को यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में अचानक से एक शख्स ने फायरिंग शुरू कर दी. उस फायरिंग में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. आरोपी ने ऐसा क्यों किया, उसकी किसी से क्या दुश्मनी थी, अभी तक कोई इनपुट सामने नहीं आया है. लेकिन अमेरिका में ये कोई पहली बार नहीं है जब मास शूटिंग की वजह से कई लोगों ने अपनी जान गंवाई हो. कई मौकों पर अमेरिका में इसी तरह कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है.
पूर्व फुटबॉल प्लेयर ने किया हमला
पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक आरोपी शख्स यूवीए फुटबॉल टीम का पूर्व प्लेयर है. उसी ने रविवार को अचानक से फायरिंग शुरू कर दी थी. हमला करने के बाद वो मौके से फरार हो गया. पुलिस ने उसकी एक तस्वीर जारी कर दी है, सभी से अपील की गई है कि कोई भी जानकारी मिलते ही तुरंत 911 पर सूचित किया जाए.
अमेरिका में नहीं थम रहीं फायरिंग की घटनाएं
अमेरिका में हुई फायरिंग घटनाओं की बात करें तो पिछले महीनों कई मौकों पर ऐसी वारदातें सामने आई हैं. इस साल अगस्त में राजधानी वॉशिंगटन डीसी में देर रात फायरिंग की घटना ने 6 लोगों की जान ले ली थी. इसी तरह अमेरिका के इंडियाना में 18 जुलाई को ग्रीनवुड पार्क मॉल में फायरिंग की घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी. कैलिफोर्निया के दक्षिणी हिस्से में हाउस पार्टी के दौरान 11 जुलाई को हमलावर की अंधाधुंध फायरिंग ने तीन लोगों की जान ली थी.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









