
अमेरिका में अल्पसंख्यक खुद 'हेट क्राइम' के शिकार, भारत को दे रहा है ज्ञान
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अमेरिका ने हाल ही में 'अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता' पर रिपोर्ट जारी की है. इसमें भारत को लेकर चिंता जताई है. दावा है कि भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव बढ़ा है. वहीं, भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है. आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है और अमेरिका में अल्पसंख्यकों की कैसी स्थिति है?
अमेरिका ने 'अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता' पर नई रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में रूस, भारत, चीन और सऊदी अरब समेत कई देशों में धार्मिक समुदायों की दुर्दशा का दावा किया गया है.
रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई गई है. कहा गया है कि कई राज्यों में धर्मांतरण पर कानूनी प्रतिबंध है. मुसलमानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है.
भारत ने अमेरिकी सरकार की इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इसे 'त्रुटिपूर्ण', 'प्रेरित' और 'पक्षपाती' बताया है.
हर साल धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) रिपोर्ट जारी करता है. और हर बार ही इसकी रिपोर्ट पर विवाद शुरू हो जाता है. पिछले साल भी इस रिपोर्ट को भारत ने 'पक्षपाती' और 'गलत' बताया है.
लेकिन होता क्या है इस रिपोर्ट में?
- कानूनन हर साल अमेरिकी सरकार को सदन में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर रिपोर्ट पेश करनी होती है. इस कानून पर 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दस्तखत किए थे.

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