
'अमेरिका के दुश्मन देशों को देने वाले फंड में करेंगे कटौती', GOP राष्ट्रपति उम्मीदवार निक्की हेली ने किया ऐलान
AajTak
अमेरिका में रिपब्लिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार निक्की हेली ने ऐलान किया कि अगर वो प्रेसिडेंट चुनी जाती हैं तो दुश्मन देशों को भेजी जाने वाली विदेशी सहायता में कटौती करेंगी. उन्होंने कहा कि ये हास्यास्पद है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा पर्यावरण के नाम पर कम्युनिस्ट चीन को दिया जाता है.
अमेरिका में राष्ट्रपति पद की दावेदारी की घोषणा करने वाली भारतीय मूल की रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने ऐलान किया है कि अगर वो राष्ट्रपति चुनी जाती हैं, तो चीन समेत अमेरिका के दुश्मन देशों को भेजे जाने वाली अरबों की विदेशी सहायता राशि में कटौती करेंगी.
रिपब्लिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार निक्की हेली ने कहा, "मैं अपने दुश्मन देशों को भेजी जाने वाली विदेशी सहायता में कटौती करूंगी. बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता फिर से शुरू कर दी और अमेरिकी टैक्सपेयर्स अभी भी हास्यास्पद पर्यावरण कार्यक्रमों के लिए कम्युनिस्ट चीन को पैसा देते हैं.”
फॉक्स न्यूज के मुताबिक, 51 वर्षीय निक्की हेली ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता बहाल करने के लिए बाइडेन प्रशासन की आलोचना की. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के विरोधी देशों को फंडिंग के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के राष्ट्रपति प्रशासनों को जिम्मेदार ठहराया. रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार निक्की हेली ने अमेरिका के विरोधी देशों को टैक्सपेयर्स का अरबों का फंड भेजना बंद करने का वादा किया.
शुक्रवार को प्रकाशित न्यू यॉर्क पोस्ट के लिए एक ऑप-एड में निक्की हेली ने विदेशी सहायता को संभालने के तरीके के लिए दोनों पक्षों की आलोचना की और कहा कि अमेरिका ने पिछले साल इराक, पाकिस्तान और यहां तक कि चीन जैसे देशों की सहायता के लिए 46 अरब डॉलर खर्च किए.
दोनों पार्टियों के शासन में अमेरिका विरोधी देशों को मिला फंड: निक्की
हेली ने लिखा, "ये सिर्फ जो बाइडेन के लिए नहीं है. यह दोनों पार्टियों के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में दशकों से हो रहा है. हमारी विदेशी सहायता नीतियां अतीत में अटकी हुई हैं, वे आम तौर पर ऑटोपायलट पर काम करते हैं. हमारी सहायता प्राप्त करने वाले देशों के आचरण पर कोई विचार नहीं करते हैं." रिपब्लिकन नेता हेली ने विशेष रूप से इराक और पाकिस्तान को विदेशी सहायता को लेकर कहा, जहां आतंकवादी संगठन संचालित होते हैं और सरकारें अमेरिका समर्थक नहीं हैं.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









