
अमेरिका की लगाई 'आग' में कैसे जल उठे दो मुस्लिम देश, सऊदी-UAE दोस्त से बन गए दुश्मन
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सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन में अलगाववादी ताकतों के समर्थन को लेकर तनाव चल रहा है. इसकी वजह अमेरिका की तरफ से फैलाई गई एक झूठी खबर है. इस गलतफहमी ने दोनों अरब मित्र देशों को एक-दूसरे का विरोधी बना दिया है.
खाड़ी की दो बड़ी शक्तियां सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस वक्त आमने-सामने हैं. दोनों देशों के बीच यमन में अलगाववादी ताकतों को समर्थन देने के मुद्दे पर तनाव बढ़ा तो बढ़ता ही चला गया. इस तनाव ने दो अरब मित्र देशों को एक-दूसरे का दुश्मन बना दिया है. अब खबर आ रही है कि ये दुश्मनी जिस वजह से हुई वो वजह अमेरिका से फैली एक झूठी खबर है.
यमन में यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने सऊदी के समर्थन वाले बलों से दक्षिणी यमन के दो प्रांतों पर कब्जा कर लिया. इसके बाद से ही दोनों इस्लामिक देश आमने-सामने हैं. दो प्रांतों पर STC के कब्जे के बाद सऊदी बलों ने यमन में हवाई हमला किया जिसमें यूएई से आए हथियारों और सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया गया.
हालांकि, अमेरिकी ब्रॉडकास्टर सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ वो गलत जानकारी थी, जो उसे अपने सूत्रों से मिली थी.
इन सूत्रों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने नवंबर में व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सूडान को लेकर बात की थी. कथित तौर पर उन्होंने ट्रंप से कहा था कि वो यूएई पर प्रतिबंध लगाएं क्योंकि उसने सूडान के गृहयुद्ध में एक पक्ष को समर्थन दिया है.
और यह झूठी खबर जब यूएई तक पहुंची तो देश के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान बौखला गए और उन्होंने यमन में सऊदी को सबक सिखाने की ठान ली.
सीएनएन के मुताबिक, सऊदी अरब अब मानता है कि इसी गलत जानकारी के चलते यूएई ने सऊदी सीमा से लगे प्रांतों में STC फोर्सेज को सक्रिय किया. बाद में सऊदी को यूएई से संपर्क कर यह बताना पड़ा कि उसने ट्रंप से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया था.

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