
अमेरिका की परमाणु सुरक्षा पर यूरोप में उठ रहे सवाल, अब टॉप-सीक्रेट सबमरीन बेस जाएंगे मैक्रों
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इमैनुएल मैक्रों टॉप-सीक्रेट सबमरीन बेस का दौरा करने वाले हैं और परमाणु वारहेड के संभावित इस्तेमाल पर फ्रांस की सोच स्पष्ट करेंगे. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब यूरोप में यूक्रेन युद्ध के फैलने की आशंका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा प्रतिबद्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक टॉप-सीक्रेट सबमरीन बेस का दौरा करने वाले हैं, ऐसे समय में जब यूरोप के कुछ देशों को अमेरिका की परमाणु सुरक्षा गारंटी को लेकर चिंता हो रही है. समुद्र की गहराइयों में तैनात ये पनडुब्बियां अंतिम विकल्प के रूप में मौजूद रहती हैं, ताकि अगर कभी फ्रांस के सर्वोच्च कमांडर को ऐसा कठोर फैसला लेना पड़े तो वे हमलावरों पर परमाणु जवाबी हमला कर सकें.
राष्ट्रपति मैक्रों सोमवार को यह स्पष्ट करेंगे कि अगर कभी ऐसी स्थिति बनती है तो पनडुब्बियों और विमानों में ले जाए जाने वाले परमाणु वारहेड के संभावित इस्तेमाल पर फ्रांस की सोच क्या होगी. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप में आशंका है कि यूक्रेन में जारी रूस का युद्ध आगे फैल सकता है और साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सहयोगी के रूप में प्रतिबद्धता को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है.
क्या जरूरत पड़ने पर साथ देगा अमेरिका?
कई दशकों तक यूरोप अमेरिकी परमाणु हथियारों की सुरक्षा में रहा है, जिन्हें 1950 के दशक के मध्य से महाद्वीप में तैनात किया गया था ताकि पहले सोवियत संघ और अब रूस को रोका जा सके. लेकिन हाल के समय में कुछ यूरोपीय राजनेता और रक्षा विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर क्या वॉशिंगटन अब भी ऐसे सैन्य कदम उठाने के लिए भरोसेमंद रहेगा.
EU में सिर्फ फ्रांस के पास परमाणु हथियार
27 सदस्यीय यूरोपीय संघ का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश होने के कारण यह सवाल फ्रांस के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है. फ्रांस की परमाणु प्रतिरोधक नीति में संभावित बदलाव, जिनका सहयोगी देशों और संभावित विरोधियों दोनों द्वारा सावधानी से मूल्यांकन किया जाएगा, मैक्रों के लिए उनके कार्यकाल के बचे लगभग 14 महीनों में सबसे अहम फैसलों में शामिल हो सकते हैं. 2027 में उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए चुनाव होने हैं.

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