
अब्दुल लतीफ राशिद बने इराक के नए राष्ट्रपति, खत्म हुई एक साल से जारी रस्साकशी
AajTak
इराक में नए राष्ट्रपति के चयन को लेकर पिछले 1 साल से जारी गतिरोध आखिर गुरुवार को खत्म हो गया. कुर्दिश नेता अब्दुल लतीफ राशिद को इराक का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया है.
इराक में नए राष्ट्रपति के चयन को लेकर पिछले 1 साल से जारी गतिरोध आखिर गुरुवार को खत्म हो गया. कुर्दिश नेता अब्दुल लतीफ राशिद को इराक का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया है.
ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक 78 साल के कुर्दिश नेता अब्दुल लतीफ राशिद अब नई सरकार के गठन में भूमिका निभाएंगे. अब्दुल 4 साल से इराक के राष्ट्रपति पद पर नियुक्त बरहम सालिह की जगह लेंगे.
राशिद ने ब्रिटिश से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वे 2003 से 2010 तक इराक के जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं. राशिद के पास सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े संसदीय ब्लॉक से एक उम्मीदवार को आमंत्रित करने के लिए 15 दिन का समय है.
बता दें कि अगस्त में इराक के अंदर अराजकता की स्थिति देखने को मिली थी. यहां पावरफुल शिया मुस्लिम धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया था, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए थे.
बगदाद में धर्मगुरु के समर्थकों और ईरान समर्थित लोगों के बीच झड़पें हो गईं थीं. घटना में 20 की मौत हो गई थी. भीड़ ने राष्ट्रपति भवन और सरकारी इमारतों पर धावा बोल दिया था.
प्रदर्शनकारियों ने शिया नेता अल-सदर की तस्वीरें हाथ में ले रखी थीं. पुलिस ने पहले सीमेंट की दीवारों को गिराने वाले प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था. अल जजीरा के मुताबिक पुलिस मेन गेट पर भीड़ को रोकने के लिए तैनात हो गई थीं, लेकिन ग्रीन जोन के दो प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने लगी थी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस द्वारा लगाई गईं सीमेंट की दीवार को तोड़ दिया और 'अल-सुदानी, आउट!' के नारे लगाए थे.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









