
अफगानिस्तान पर 'दिल्ली डायलॉग' भारत के लिए क्यों अहम? जानें चीन-पाकिस्तान की गैरमौजूदगी के मायने
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अफगानिस्तान मुद्दे पर बुधवार को दिल्ली में 8 देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग हुई. इस बैठक से चीन और पाकिस्तान नदारद हैं. इस बैठक का क्या है एजेंडा? भारत का क्या है एजेंडा? जानें इस बारे में सबकुछ...
अफगानिस्तान मसले पर नई दिल्ली में आज से एक अहम कॉन्फ्रेंस हुई. इस कॉन्फ्रेंस में 8 देशों ने हिस्सा लिया. अफगानिस्तान के मसले पर ये तीसरी ऐसी मीटिंग हो रही है और पहली बार भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है. इस बैठक में भारत समेत 8 देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बैठक कर रहे हैं. इस कॉन्फ्रेंस में तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में बढ़े आतंकवाद, उग्रवाद, नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी जैसे मुद्दों के अलावा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा होगी.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.








