
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने तालिबान को दिया अल्टीमेटम, पाकिस्तान को भी लिया आड़े हाथों
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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि तालिबान के रवैया से लग रहा कि वो शांति स्थापित करने का इच्छुक नहीं है. आगे तालिबान के रुख के आधार पर ही सरकार निर्णय लेगी.
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि तालिबान के रवैये से लग रहा कि वो शांति स्थापित करने का इच्छुक नहीं है. आगे तालिबान के रुख के आधार पर ही सरकार निर्णय लेगी. ईद के मौके पर अपने भाषण में अशरफ गनी ने कहा कि वार्ता के लिए दोहा में एक उच्च पदस्थ प्रतिनिधिमंडल भेजने का इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान का फैसला एक अल्टीमेटम था. (फोटो-AP) राष्ट्रपति के इस भाषण से थोड़ी देर पहले ही काबुल में अति सुरक्षित प्रेसिडेंट पैलेस के पास रॉकेट दागे गए. रॉकेट अटैक के दौरान पैलेस परिसर में लोग नमाज अदा कर रहे थे. हालांकि, इस हमले के दौरान कोई हताहत नहीं हुआ. इसकी अभी किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है. सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले अब्दुल्ला अब्दुल्ला मंगलवार को रॉकेट हमले के दौरान पैलेस के अंदर ही मौजूद थे. वह सोमवार को कतर में तालिबान के साथ शांति वार्ता के बाद से लौटे हैं. (फोटो-AP)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

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ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?








