
'अपने खिलाफ युद्ध की खुद फंडिंग...', भारत को टारगेट करते ट्रंप के मंत्री की तोप यूरोप पर घुम गई
AajTak
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पहले भारत की रूस से तेल खरीद पर आलोचना की. और अब उनके निशाने पर यूरोपीय देश हैं. उन्होंने रिफाइंड रूसी तेल की खरीद को लेकर यूरोपीय देशों को टार्गेट किया है.
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत को लगातार निशाना बनाते आए हैं. लेकिन यकायक अब यूरोप उनका टार्गेट बन गया है. उन्होंने कहा है कि भारत धीरे-धीरे रूस से तेल खरीद कम करेगा लेकिन उन यूरोपीय देशों का क्या जो भारत से रूसी रिफाइंड तेल खरीद रहे हैं. उन्होंने अमेरिका के सहयोगी यूरोपीय देशों को निशाना बनाते हुए कहा है कि वो अपने खिलाफ हो रहे युद्ध को खुद ही फंड कर रहे हैं.
रूस से तेल व्यापार को लेकर भारत पर लगाए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का हवाला देते हुए बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा, 'सबसे विरोधाभासी बात यह है कि भारत सस्ता रूस तेल खरीद रहा है, और अनुमान लगाइए, रिफाइंड उत्पाद कहां जा रहे हैं? वे यूरोप लौट रहे हैं. यानी यूरोपीय देश अपने ही खिलाफ युद्ध को फंडिंग कर रहे हैं.'
बेसेंट की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है. यह वार्ता रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बाद हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन में चल रहे युद्ध में रूस की मदद कर रहा है. और इसी को लेकर उन्होंने भारत पर टैरिफ बढ़ा दिया है.
भारत पर अमेरिका का कुल 50% टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गया है. अमेरिका लंबे समय से भारत पर लगाए टैरिफ का बचाव करता आया है और इसे रूस पर दबाव बनाने का तरीका मानता है.
इंटरव्यू में बेसेंट ने भी उम्मीद जताई कि भारत धीरे-धीरे रूस से अपनी निर्भरता कम करेगा. हालांकि, पिछले ही महीने उन्होंने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि भारत रूसी तेल रिफाइन कर भारी मुनाफा कमा रहा है.
स्कॉट बेसेंट ने इससे पहले कहा था कि यूरोपीय संघ के देशों को भी रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने में अमेरिका का साथ देना चाहिए. इस बयान में उनका निशाना रूसी तेल खरीदने वाले देशों भारत और चीन पर था.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









