
अजित दादा के निधन के बाद 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा, जानिए कैसे मिलता है स्टेटस और फायदा
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महाराष्ट्र में अगस्त 2025 से पेंडिग पड़े अल्पसंख्यक दर्जे वाली फाइल को उस समय हरी झंडी मिलने लगी, जब अजित पवार का निधन हुआ. 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच 75 शिक्षण संस्थानों कोे अल्पसंख्यक दर्जा मिला, जिस पर सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने रोक लगा दी है.
महाराष्ट्र में शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है.अजित पवार के निधन के बाद चार दिनों में राज्य के 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. यह बात सामने आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सोमवार को 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर दी है.
अल्पसंख्यक मामले का विभाग महाराष्ट्र में अजित पवार के पास था. अगस्त 2025 से किसी भी संस्थान को कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था, लेकिन 28 जनवरी को अजित पवार का एक हादसे में निधन हो गया.इसके फौरन बाद ही 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच 75 शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. राज्य में इस दौरान आधिकारिक तौर पर शोक चल रहा था.
अल्पसंख्यक दर्जा देने पर सियासी बवाल
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि तीन दिनों में 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देना बेहद चिंताजनक है. पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए.
सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने वाले सभी मंजूरियों,अनुदानों और प्रमाणपत्रों को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया है. जब तक विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ये फैसले लागू नहीं होंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से क्या बदल जाता है और क्या होता है?
अल्पसंख्यक दर्जा क्या होता है? भारतीय संविधान के मुताबिक सभी धर्म के लोग अपने शिक्षण संस्थान चला सकते हैं. शिक्षण संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा भारत के संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों द्वारा अपने पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित और प्रशासित करने का मौलिक अधिकार है. यह अल्पसंख्यक दर्जा किसी समुदाय (जैसे- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन) को अपनी संस्कृति और शिक्षा को संरक्षित करने के लिए विशेष प्रशासनिक और प्रवेश संबंधी स्वायत्तता प्रदान करता है.

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