
अजमेर: खादिम के बयान का असर, बकरीद के मौके पर दरगाह में सन्नाटा, होटल खाली
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ईद उल अजहा के मोके पर भी दरगाह की सड़कें सुनसान सी नजर आ रही हैं. एक ओर जहां बीते सालों में ईद के मोके पर दरगाह बाजार में आने-जाने में भी परेशानी होती थी. वहीं अब जायरीन की संख्या सीमित हो गई है.
अजमेर के कुछ खादिमों द्वारा दिए जा रहे विवादित बयानों का असर अब सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में जियारत के लिए आने वाले जायरीन पर भी हो रहा है. ईद उल अजहा के मोके पर भी दरगाह की सड़कें सुनसान सी नजर आ रही हैं.
एक ओर जहां बीते सालों में ईद के मोके पर दरगाह बाजार में आने-जाने में भी परेशानी होती थी. वहीं अब जायरीन की संख्या सीमित हो गई है. कोरोना काल से पहले की बात की जाए तो ईद के मोके पर हजारों जायरीन जियारत के लिए अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पहुंचते थे, लेकिन अब हालात बदलते जा रहे हैं.
होटल भी पड़े हैं खाली
इसके अलावा अजमेर के होटल व्यवसाय की बात करें तो सभी होटल खाली से नजर आ रहे हैं. होटलों में इक्का-दुक्का कमरे ही भरे हैं. जिससे होटल मालिकों की लागत भी नहीं निकल पा रही है. एक होटल मैनेजर, दीवान सिंह राठौड़ ने बताया कि यहां बीते दिनों जो कुछ हुआ, उससे जायरीनों में दहशत है, लोग यहां आने से डर रहे हैं. यहां आने वाले जायरीनों की संख्या केवल 10 फीसदी रह गई है. उन्होंने होटल के कारोबार के बारे में बताते हुए कहा कि पहले रमजान के महीने को छोड़कर बाकी दिनों 90 फीसदी तक कमरे बुक रहते थे. लेकिन आज 17 में से केवल 5 कमरे बुक हैं.
बीते कुछ दिनों में ठप हुआ कारोबार
दरगाह बाजार में गुलाब के फूलों की दुकानें भी वीरान हो चली हैं. अचानक हुई जायरीनों की संख्या में कमी से व्यापारी परेशान हैं. जानकारी के अनुसार, दरगाह बाजार क्षेत्र में व्यापार करीब 70 प्रतिशत तक कम हुआ है. इन सब के पीछे बीते दिनों अजमेर के कुछ खादिमों के वायरल हुए वीडियो को वजह माना जा रहा है. एक अन्य कारोबारी अश्विनी कुमार सैनी ने बताया दरगाह क्षेत्र में व्यापार एकदम ठप हो गया है. ये सब बीते करीब आठ दिनों में हुआ है. अभी स्थिति ऐसी हो गई है कि ईद की वजह से थोड़े-बहुत जायरीन नजर आ रहे हैं. हम लोग अपील करते हैं कि सभी लोग भाई-चारे के साथ रहें.

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