
अखिलेश यादव ने बुलाई गठबंधन दलों की बैठक, शिवपाल यादव को भी किया गया आमंत्रित
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UP News: सूत्रों की मानें तो शिवपाल सिंह यादव अपने भतीजे अखिलेश यादव से नाराज चल रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज शाम 5 बजे गठबंधन दलों की बैठक बुलाई है. इसमें शिवपाल सिंह यादव, ओमप्रकाश राजभर, पल्लवी पटेल और राजपाल बालियान को आमंत्रित किया गया है. इस बैठक में चुनावी नतीजों को लेकर चर्चा की जाएगी और आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा. लेकिन इस बैठक में शिवपाल यादव के शामिल होने पर संशय बरकरार है.
इस बैठक में प्रसपा, रालोद, सुभासपा, जनवादी पार्टी, महान दल और अपना दल कमेरावादी को बुलाया गया है. ताजा जानकारी के अनुसार, प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव दिल्ली से लखनऊ के लिए निकल गए हैं. हालांकि, अब सवाल यह है कि वह इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं? सूत्रों के मुताबिक शिवपाल यादव सपा प्रमुख अखिलेश यादव के रवैये से बेहद आहत हैं और अपमानित महसूस कर रहे हैं.
इसके पीछे वजह यह है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में विधायक दल की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में शिवपाल यादव को नहीं बुलाया गया था. इसमें अखिलेश यादव को विधायक दल का नेता चुना गया था. बैठक में न बुलाए जाने के बाद से शिवपाल यादव नाराज चल रहे हैं.
दरअसल, शिवपाल यादव की नाराजगी इस बात को लेकर है कि वे समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, ऐसे में उन्हें इस बैठक में बुलाया जाना चाहिए था. वहीं, सपा का कहना है कि यह बैठक सपा विधायकों की थी. इसमें किसी भी सहयोगी दल से किसी नेता को नहीं बुलाया गया था.
शिवपाल के करीबियों का कहना है कि लगातार चुनाव में शिवपाल यादव ने अखिलेश और समाजवादी पार्टी के समर्थन में हर कदम उठाया. यहां तक कि खुद भी शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह 'साइकिल' से चुनाव लड़े और अपनी पार्टी के नेताओं को टिकट दिलाने को लेकर भी नहीं अड़े. लोगों के बीच उन्होंने बार-बार यह कहा कि वह समाजवादी पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं. ऐसे में उनको उम्मीद थी कि उनका भतीजे उनके मान और सम्मान का ध्यान रखेंगे.
शिवपाल यादव लगातार यही बात कहते रहे कि पूरा यादव परिवार एकजुट है ताकि किसी भी तरह से परिवार में बिखराव का संदेश ना जाए. इसके बाद भी अखिलेश का यह व्यवहार चाचा को नागवार गुजरा है. इसी वजह से उन्होंने गठबंधन दलों की बैठक से कन्नी काटी. शिवपाल के समर्थकों को लगता है कि जानबूझकर अखिलेश, चाचा को उनकी जगह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

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