
UNSC का अस्थाई सदस्य बना पाकिस्तान, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की खाई कसम
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पाकिस्तान ने 1 जनवरी से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो साल की अस्थायी सदस्यता ग्रहण की है. शीर्ष राजनयिक मुनिर अकरम के अनुसार, पाकिस्तान वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएगा. 182 वोटों के साथ चुना गया यह पाकिस्तान का आठवां कार्यकाल है. आगामी चुनौतियों में आतंकवाद से लड़ाई और शांति को बढ़ावा देना शामिल है.
पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल में दो साल के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है. पड़ोसी मुल्क ने 1 जनवरी से यूएनएसी की सदस्यता ग्रहण की. पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में शीर्ष राजनयिक, मुनिर अकरम ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वैश्विक चुनौतियों का "सक्रिय और रचनात्मक" समाधान देने में भूमिका निभाएगा, और आतंकवाद के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए काम करेगा.
यूनाइटेड नेशन की वेबसाइट के मुताबिक, पाकिस्तान 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए सिक्योरिटी काउंसिल की अध्यक्षता भी संभालेगा. पाकिस्तानी राजनयिक मुनिर अकरम ने बताया कि "सुरक्षा परिषद में हमारी उपस्थिति महसूस की जाएगी." यह आठवीं बार है, जब पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यीय पैनल में जगह मिली है.
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182 वोटों के साथ पाकिस्तान का हुआ था चुनाव
पाकिस्तान को जून 2024 में 193 सदस्यीय-जनरल असेंबली में 182 वोटों के साथ सिक्योरिटी काउंसिल की अस्थायी सदस्यता के लिए चुना गया था, जबकि इसके लिए सिर्फ 124 सदस्य देशों के वोटों की जरूरत होती है. पाकिस्तान ने जापान की जगह ली है, जो फिलहाल सुरक्षा परिषद में एशियाई सीट पर काबिज है, जिससे वैश्विक शांति की अपील की जाती है.
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की खाई कसम

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