
Stock Market Crash: 40 लाख करोड़ डूबे, दिवाली से पहले शेयर बाजार का बुरा हाल, ये है असली वजह!
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सबसे ज्यादा रिटेल निवेशकों (Retail Investor) में हाहाकार मचा है. ये हम नहीं, डेटा चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है. पिछले एक महीने का डेटा यही गवाह दे रहा है कि बाजार बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है.
चंद दिन पहले तक पूछा जाता था कि कितना बनाया? लेकिन अब पूछा जा रहा है कि कितना डूबा? क्योंकि शेयर बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार पैसे डूब रहे हैं. वर्षों तक इंतजार के बाद कई निवेशकों का पोर्टफोलियो (Portfolio) हरा हुआ था, वो सब एक महीने के अंदर ही लाल रंग में पटा पड़ा है. अधिकतर रिटेल निवेशकों का यही कहना है कि सालभर में जो भी कमाई हुई थी, वो सब चंद दिन की गिरावट में साफ हो गई. यही मायने में कोविड के बाद इस तरह की गिरावट पहली बार देखी जा रही है.
दरअसल, सबसे ज्यादा रिटेल निवेशकों (Retail Investor) में हाहाकार मचा है. ये हम नहीं, डेटा चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है. पिछले एक महीने का डेटा यही गवाह दे रहा है कि बाजार बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है. हर सुबह निवेशकों को यही लगता है कि अब बाजार में तेजी आएगी. लेकिन बिकवाली हर रोज हावी हो जा रहा है, और निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब रही है. ऐसे में निवेशक कह रहे हैं कि दिवाली से पहले मां लक्ष्मी शेयर बाजार से इतनी नाराज क्यों हो गई हैं.
शेयर बाजार में भारी गिरावट
पिछले 1 महीने में चुनिंदा मिडकैप-स्मॉलकैप शेयर 50% तक टूट चुके हैं. अगर इंडेक्स की बात करें तो सेंसेक्स (Sensex) ऑल टाइम हाई से करीब 6500 अंक और निफ्टी (Nifty) करीब 2100 अंक नीचे आ गए हैं. निफ्टी 8% से ज्यादा गिर चुका है, जबकि सेंसेक्स भी 8% फिसला है. सेक्टर के तौर पर डिफेंस इंडेक्स (Defence Index) शिखर से 26% गिर चुका है. वहीं ऑटो सेक्टर में 14% और कैपिटल गुड्स में 13.5% की गिरावट दर्ज की गई है.
पिछले एक महीने में कितना नुकसान हुआ, इसका आंकड़ा झकझोर देने वाला है. इस बिकवाली के तूफान में महीने भर के अंदर निवेशकों के 40 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं. 27 सितंबर 2024 को BSE का मार्केट कैप (Market Cap) करीब 477 लाख करोड़ रुपये था, जो 25 अक्टूबर को गिरकर 437 लाख करोड़ पर आ गया है.
अब नुकसान को इस तरह से भी देख सकते हैं कि वित्त वर्ष 2023-24 में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) कुल 20.18 लाख करोड़ रुपये रहा था. जबकि पिछले एक महीने में निवेशकों के 40 लाख करोड़ रुपये बाजार में डूब चुके हैं, ऐसे में सरकार सालभर में जीएसटी से जितनी आमदनी हुई थी, उससे दोगुनी राशि पिछले एक महीने के अंदर बाजार में डूब चुके हैं.

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