
Saudi Arabia और UAE के बीच बढ़ी दरार! क्यों आपस में भिड़ रहे अरब के मुस्लिम देश
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खाड़ी के दो सबसे बड़े तेल उत्पादक सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन और तेल के मुद्दे को लेकर भारी विवाद चल रहा है. सऊदी यमन मेंं यूएई के बढ़ते प्रभाव पर आपत्ति जता रहा है. प्रमुख तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक में भी दोनों देशों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. चर्चा तो ये भी है कि यूएई ओपेक छोड़ने वाला है.
खाड़ी की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच पैसे और पावर के लिए इन दिनों भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. जनवरी में यूएई की राजधानी अबू धाबी में मध्य-पूर्व के नेताओं ने एक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था जिसमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अनुपस्थित थे. शिखर सम्मेलन में उनकी अनुपस्थिति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और इससे स्पष्ट संदेश गया कि सऊदी अरब और यूएई के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
पिछले दिसंबर में यूएई के शीर्ष नेता राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भी सऊदी की राजधानी रियाद में आयोजित हाई प्रोफाइल चीन-अरब सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे.
खाड़ी के अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग से कहा कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति जानबूझकर इन सम्मेलनों से दूर रहे. सऊदी अरब और यूएई औपचारिक रूप से अभी भी सहयोगी बने हुए हैं लेकिन विदेशी निवेश और तेल बाजार में प्रभाव बढ़ाने के लिए दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है. इसी प्रतिस्पर्धा में दोनों देश कई मोर्चों पर अलग हो गए हैं.
पहले दोनों देशों के बीच की असहमतियां बंद दरवाजों के पीछे थीं लेकिन अब कई ऐसी खबरें तेजी से बाहर आ रही हैं जिसमें दोनों देशों के बीच का तनाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है. दोनों पड़ोसी सहयोगियों के बीच यह असहमति ऐसे वक्त में सामने आई है जब ईरान मध्य-पूर्व में अपने प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ओपेक की भूमिका बेहद अहम हो गई है. ऐसे में दोनों पड़ोसियों के बीच की यह तनातनी मध्य-पूर्व और पूरी दुनिया के लिए नुकसानदेह है.
तनाव कम करने की कोशिशें नाकाम

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