
Russia-Ukraine War: यूक्रेन के 400 ठिकानों को रूसी तोपों ने बनाया निशाना, US के भेजे हथियार भी तबाह
AajTak
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है. इतने दिन बाद भी रूस के हमले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. इतने दिन बाद भी यूक्रेन से लोगों का पलायन जारी है.
रूस ने यूक्रेन के 400 से ज्यादा ठिकानों को तबाह कर दिया है. रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनाशेनकोव ने कहा कि उनकी तोपों ने मंगलवर को यूक्रेन के तोपखानों और दो ईंधन डिपो को भी निशाना बनाया गया है. इसके अलावा रूसी विमानों ने 39 अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया है, जिसमें सैनिकों, हथियारों और दो कमांड पोस्ट शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने जो आर्टिलरी रडार, चार एयर डिफेंस रडार और छह गोला-बारूद डिपो को भी नष्ट कर दिया गया है.
लवीव में हमले से पावर स्टेशन, पंप स्टेशन ठप
रूसी सेना ने अपने हवाई हमले में यूक्रेन के लवीव शहर को भी अपना निशाना बनाया. यहां मंगलवार को चार अलग-अलग विस्फोटों की आवाज सुनाई दी. मेयर एंड्री सदोवी ने कहा कि हमलों की वजह से तीन बिजली के सबस्टेशन क्षतिग्रस्त हो गए हैं. इससे लवीव के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई.
उन्होंने कहा कि बिजली न होने से दो पंप स्टेशन भी काम नहीं कर रहे हैं, जिससे शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो गई है. सदोवी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहर के लोगों को शरण ले लेनी चाहिए. लवीव से निकलने वाली ट्रेनों ने सेवा बंद कर दी हैं.
डोनेट्स्क में रासायनिक संयंत्र पर हमला, 10 की मौत
डोनेट्स्क के गवर्नर ने कहा कि रूसी सैनिकों ने मंगलवार को पूर्वी यूक्रेन के एक शहर अवदिवका में एक रासायनिक संयंत्र पर गोलाबारी की. इस हमले में कम से कम 10 लोग मारे गए हैं, जबकि 15 लोग जख्मी हो गए हैं.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








