
Quad Summit: रूस से दोस्ती, अमेरिका से याराना और चीन की घुड़की...PM Modi का बड़ा इम्तिहान
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QUAD समिट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान रवाना हो गए हैं. वे कई अहम मुद्दों पर चर्चा करने जा रहे हैं. कोरोना से लेकर अर्थव्यवस्था तक, कई मुद्दों पर बात होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वॉड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान में दो दिवसीय दौरा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री इस दौरे में करीब 23 कार्यक्रमों में शामिल होंगे और साथ ही साथ कई बड़ी मुलाकातें भी करने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और ऑस्ट्रेलिया के पीएम से भी मुलाकात करेंगे. इसके अलावा वे जापान के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करने वाले हैं. पीएम का यह दौरा राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है.
इस बारे में एम्बेसडर रह चुके अनिल त्रिगुणायत का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा सभी लहजे से बहुत ही महत्वपूर्ण है. यह दौरा दूसरे देशों से रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. साथ ही साथ इस समिट में द्विपक्षीय मुलालतों में बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होगी.
किन मुद्दों पर होगा मंथन?
त्रिगुणायत कहते हैं कि इस समिट में टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट चेंज, विकास और वैक्सीन जैसे मुद्दों पर चर्चाएं होंगी. इस पूरी चर्चा में सबसे पहले पुराने कोर्ट समिट पर कितनी प्रगति हुई, इस बात पर भी चर्चा की जाएगी. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी साझेदारी और दूसरे देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा कोट समिट में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते इंधन की चुनौती से कैसे लड़ना जैसे मुद्दों पर भी मंथन होगा.
क्वॉड देशों के बीच तकनीक को लेकर किस तरह से विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा जा सकता है यह भी चर्चा का विषय होगा. इस चर्चा में बायोटेक्नोलॉजी से लेकर साइबरसिक्योरिटी तक जैसे विषय शामिल होंगे. साथ ही इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि क्वॉड देशों को हाईटेक किस तरह से बनाया जा सकता है.
पिछले 2 सालों में पूरा विश्व कोरोना महामारी के संकट से गुजरा है. ऐसे में कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में साझेदारी भी एक महत्वपूर्ण विषय होगा. इसमें कोरोना वैक्सीन से लेकर आर्थिक संकटों से किस तरह उभरा जाए इस पर भी बातचीत होगी.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

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